विभिन्न अंचलों से आए हुए भक्तों की अनुमोदना के साथ प.पू. आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के मंगल शुभाशीष से प.पू. मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज ससंघ ने 'तत्वार्णव पावसयोग' 2022 की मंगल स्थापना विधि विधान के साथ की। इसके बाद मुनि श्री सुप्रभसागर जी की नवीन कृति 'भवितव्यता' का विमोचन गंजबासौदा की विधायिका श्रीमती लीना जैन के साथ अतिथिगणों ने किया। इस मौके पर मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना में कहा कि जहाँ श्रावक और साधु धर्म से जुड़ता है वहीं तो है चातुर्मास, वर्षायोग, पावसयोग ।
कार्यक्रम के दूसरे दिन गुरु पूर्णिमा पर्व पर भक्तों ने गुरु गुणगान के रूप में शब्दों की विनयांजलि गुरु चरणों में व्यक्त की। मुख्य रूप से सौ. डा. चंदन शहा सोलापुर (महाराष्ट्र), सुरेश जैन विदिशा, डा. अभय कुमार जैन विदिशा, निर्मल जैन गोंदिया ने विनयांजलि प्रस्तुत की। इसी क्रम में परम पूज्य मुनि श्री प्रणतसागर महाराज द्वारा सृजित कृति 'सु - विशुद्ध बाल संस्कार भाग -1' का विमोचन किया गया।जीवन को सम्यक आकार देते हैं गुरु :मुनिश्रीइस अवसर पर श्रमण मुनि श्री सुप्रभसागर जी महाराज ने कहा कि संस्कार ही जीवन को सम्यक आकार दे सकते हैं और संस्कारों को हम गुरुओं से ही प्राप्त कर सकते हैं। गुरु वही जो जीवन के गूढ रहस्यों को उद्घाटित करने वाला होता है। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य संजय जैन विदिशा, सुशील जैन गोबरबाही (महाराष्ट्र) अजय जैन, विदिशा, राजीव जैन झाईपौर, प्रेमचंद जैन विदिशा आदि ने प्राप्त किया।
उत्साह से मनाई वीर शासन जयंती :आयोजन के अंतिम दिन ' वीर शासन जयंती' मनाई गई। प्रातःकाल परम पूज्य मुनिश्री संसंघ के सान्निध्य में श्री महावीर स्वामी भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। तदुपरांत श्री वर्द्धमान स्वामी का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा के साथ ही गौतम स्वामी की भी पूजन सम्पन्न हुई।





