धर्म साधना में रत शांतिदेवी जैन का देवलोकगमन : समाजसेवी राजेंद्र भंडारी को हुआ मातृ शोक

नगर की त्यागीवृति, धर्म साधना में रत वयोवृद्ध विदुषी महिला शांतिदेवी जैन का देवलोकगमन हो गया। जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी, उद्यमी एवं अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी की माताजी शांतिदेवी जैन का 85 वर्ष की आयु में महामंत्र णमोकर, समाधि भावना, भक्तामर पाठ एवं श्री जिनेंद्र प्रभु की स्तुति सुनते हुए मध्य रात्रि को निधन हो गया। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर...
मुरैना। नगर की त्यागीवृति, धर्म साधना में रत वयोवृद्ध विदुषी महिला शांतिदेवी जैन का देवलोकगमन हो गया। जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी, उद्यमी एवं अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी की माताजी शांतिदेवी जैन का 85 वर्ष की आयु में महामंत्र णमोकर, समाधि भावना, भक्तामर पाठ एवं श्री जिनेंद्र प्रभु की स्तुति सुनते हुए मध्य रात्रि को निधन हो गया। शांतिदेवी जैन प्रारंभ से ही धार्मिक महिला थीं। लगभग 40 वर्ष पूर्व ही आपने आचार्यश्री सुमति सागर एवं आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संयम साधना हेतु अनेकों व्रत धारण कर शुद्रजल सहित सभी बाजारू भोजनादि का त्याग कर दिया था। 85 वर्ष की उम्र में भी प्रतिदिन श्री जिनेन्द्र प्रभु की आराधना करना, पूजन भक्ति करना उनकी दिनचर्या में शामिल था। वे अपने व्रतों के पालन में कभी भी कोई समझौता नहीं करती थी। गृहस्थ अवस्था में रहकर भी वे एक साध्वी की तरह संयम साधना करते हुए अपना जीवन यापन कर रहीं थीं। विगत कुछ दिनों से उनका स्वास्थ्य खराब था। डॉक्टरों ने यह उनका अंतिम समय बताया। शांतिदेवी जैन ने अपने धार्मिक सिद्धांतों को दृष्टिगत रखते हुए किसी भी प्रकार की दवा आदि लेने से इंकार कर दिया। पूर्ण चेतना अवस्था में समाधि भावना एवं णमोकार मंत्र सुनते हुए उन्होंने अपनी नश्वर देह का त्याग किया। उनके निधन का समाचार सुनते ही सम्पूर्ण जैन समाज में शोक की लहर छा गई। उनका अंतिम संस्कार चंदन की लकड़ी, देशी घी, नारियल, गोला, कपूर के साथ स्थानीय मुक्तिधाम में किया गया। जिसमें नगर के उद्योगपति, पत्रकार, समाजसेवी एवं श्रावक श्रेष्ठी सम्मिलित हुए। शांतिदेवी जैन को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए बुधवार 14 जनवरी दोपहर 2 बजे अग्रसेन पार्क जीवाजी गंज मुरैना में बैठक का आयोजन रखा गया है।
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