साढूमल। श्री महावीर दिगंबर जैन संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं श्री गणेश वर्णी छात्रावास में पूज्य गणेश प्रसाद वर्णी जी की 153वीं जयंती श्रद्धा, उत्साह एवं विविध आयोजनों के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में प्रभातफेरी, मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, विचार गोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण आयोजित हुए।

विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से वर्णी जी के जीवन, शिक्षा और संस्कारों के संदेश को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। समारोह का शुभारंभ छात्रा मंजरी कुशवाहा के मंगलाचरण से हुआ। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं वर्णी जी के चित्र का अनावरण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया तथा प्रातःकाल विद्यालय परिसर से प्रभातफेरी भी निकाली गई।

शिक्षा के साथ संस्कारों का आह्वान

समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं अतिथियों ने गणेश प्रसाद वर्णी जी के जीवन, त्याग, सादगी, शिक्षा, संस्कार और समाजसेवा पर विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से वर्णी जी के जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, स्वावलंबन एवं सदाचरण को अपनाने का आह्वान किया।

विद्यालय के हेड ट्रस्टी डॉ. सुनील जैन, भोपाल ने कहा कि पूज्य गणेश प्रसाद वर्णी जी ने देशभर में अनेक शिक्षण संस्थाओं एवं गुरुकुलों की स्थापना तथा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रेरणा से वर्ष 1917 में लक्ष्मीचंद्र रईस बमराना द्वारा साढूमल में इस विद्यालय का शुभारंभ किया गया था। आज यहां से शिक्षा प्राप्त कर सैकड़ों विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर पहुंचकर समाज एवं राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।

पांच स्नातक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित

शिरोमणि जैन, झांसी ने बताया कि विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले पांच स्नातक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। विद्यालय के अनेक पूर्व विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल स्तर पर भी सम्मान प्राप्त हुआ है। इसे संस्था के लिए गौरव का विषय बताया गया।

ट्रस्टी डॉ. सुनील जैन ‘संचय’ ने कहा कि मड़ावरा के निकट हँसेरा ग्राम में जन्मे वर्णी जी का स्वतंत्रता संग्राम में भी उल्लेखनीय योगदान रहा। जबलपुर में आयोजित एक आमसभा में स्वतंत्रता सेनानियों की सहायता के लिए उन्होंने अपनी चादर तक समर्पित कर दी थी। उस चादर से तत्काल तीन हजार रुपये की राशि प्राप्त होना उनके त्याग, प्रभाव और राष्ट्रप्रेम का उदाहरण है। उन्होंने भारतीय प्राच्य विद्याओं के संरक्षण एवं संवर्धन में वर्णी जी के योगदान को स्मरणीय बताया।

ट्रस्टी सुधीर जैन ने कहा कि वर्णी जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने के लिए उनकी आत्मकृति ‘मेरी जीवन गाथा’ का अध्ययन सभी को करना चाहिए। उन्होंने इसे वर्णी जी के संघर्ष, स्वावलंबन, व्यक्तित्व एवं आध्यात्मिक जीवन को जानने की महत्वपूर्ण कृति बताया।

मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित

संस्था के पूर्व हेड ट्रस्टी स्वर्गीय सेठ सनत कुमार जैन की पुण्यतिथि के अवसर पर सेठ परिवार की ओर से विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को शील्ड एवं पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।

जनपद स्तरीय संस्कृत गीत गायन प्रतियोगिता में विद्यालय का नाम गौरवान्वित करने वाली छात्रा कंचन कुशवाहा को भी विशेष पुरस्कार दिया गया। समारोह के दौरान शुगर एवं ब्लड प्रेशर आदि की निःशुल्क जांच की व्यवस्था भी रही।

‘अंतर्मन का आलोक’ का विमोचन

कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुनील जैन ‘संचय’ की कृति ‘अंतर्मन का आलोक’ का अतिथियों एवं विद्यालय पदाधिकारियों द्वारा विमोचन किया गया। विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रो. गोकुलचंद्र जैन का स्मृति ग्रंथ उनके सुपुत्र किशोरकांत गोरावाला, वाराणसी ने विद्यालय पुस्तकालय के लिए समिति को भेंट किया।

शिक्षक-शिक्षिकाओं का रहा विशेष योगदान

समारोह का संचालन विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिषेक कुमार जैन शास्त्री ने किया तथा आभार विद्यालय के मंत्री जीवन कुमार जैन ने व्यक्त किया। अतिथियों का स्वागत प्रबंधक एडवोकेट धन्यकुमार जैन, अध्यक्ष वर्द्धमान जैन, मंत्री जीवन कुमार जैन, कोषाध्यक्ष दीपक कुमार जैन, संरक्षक कमल कुमार जैन, राजेंद्र जैन, देवांशु जैन, प्रकाशचंद्र जैन एवं मंजू जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया।

आयोजन में प्रधानाचार्य अभिषेक शास्त्री, विज्ञान शिक्षक नरेंद्र नामदेव, संस्कृत शिक्षक शीलचंद्र जैन, सामाजिक विज्ञान शिक्षक सुरेंद्र जैन, गणित शिक्षक संजय सेन, नागरिक शास्त्र शिक्षक भूपेंद्र नामदेव, अंग्रेजी शिक्षिका बबली कुशवाहा, हिंदी शिक्षिका सुहानी एवं गृह विज्ञान शिक्षिका तनाज करीम खान सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का योगदान रहा। उत्कृष्ट सहयोग देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित कर उत्साहवर्धन किया गया।

श्रीफल साथी : सुनील जैन, साढूमल