
पूज्य मुनि श्री ने श्री शान्तिनाथ भगवान की वंदना कर समाज को सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन में निर्माण और निर्वाण होते हैं। हम निर्माण तो बहुत करते हैं परंतु निर्वाण प्राप्ति की ओर ध्यान नहीं देते। पूज्य मुनि श्री ने रानी बाग जिनालय की भव्यता व दिव्यता को देखकर प्रसन्नता का अनुभव किया तथा समाज की भूरी-भूरी प्रशंसा की।




