आगरा। श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर समिति, जयपुर हाउस के तत्वावधान में टीचर्स कॉलोनी स्थित श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में परम पूज्य अंकलीकर अक्षुण्ण परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज का 23वां परम्पराचार्य पदारोहण दिवस श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। समारोह मुनि श्री स्वयम्भू सागर जी महाराज एवं क्षुल्लिका श्री सुअथेष्ठ मति माताजी के मंगल सान्निध्य में आयोजित हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन एवं मंगलाचरण से शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं चित्र अनावरण के साथ हुआ। स्वास्तिक महिला मंडल एवं शांतिनाथ महिला मंडल की महिलाओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अष्टद्रव्य की थाल सजाकर परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज का गुरु पूजन किया।

तप, त्याग और संयम को किया नमन

गुरु पूजन के दौरान श्रद्धालुओं ने परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज के तप, त्याग, संयम एवं धर्म प्रभावना को नमन किया। सौभाग्यशाली भक्तों ने परम्पराचार्य श्री के चरणों का प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए तथा मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

नवीन पिच्छी एवं श्रीफल किए भेंट

इस अवसर पर सौभाग्यशाली परिवार द्वारा परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज को नवीन पिच्छी भेंट कर श्रद्धाभाव व्यक्त किया गया। बाहर से पधारे गुरु भक्तों ने भी परम्पराचार्य श्री के समक्ष श्रीफल भेंट किए।

दिनभर बना रहा धार्मिक वातावरण

समारोह के दौरान मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय एवं धार्मिक वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विभिन्न धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर धर्मलाभ लिया।

समाजजनों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष राकेश जैन, मंत्री दीपक जैन, विनोद रांवका, सुबोध जैन, नीरज जैन जिनवाणी, मनोज जैन, बॉबी जैन, राहुल जैन, अभिषेक जैन, अमित सेठिया, रॉबिन जैन, भूषण जैन, रुचि जैन, पूजा जैन, एकता जैन, मालती जैन, नीता जैन, वंदना जैन एवं शिल्पी जैन सहित शांतिनाथ युवा मंडल, शांतिनाथ महिला मंडल एवं स्वास्तिक महिला मंडल के सदस्य तथा बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

गुरु परम्परा और धर्म प्रभावना का संदेश

पदारोहण दिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं ने परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज के तप, त्याग, संयम एवं धर्म प्रभावना को स्मरण करते हुए गुरु परम्परा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। आयोजन ने समाज में धार्मिक संस्कारों एवं गुरु भक्ति की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।