धरियावद, 10 अगस्त। वर्षायोग स्थल महावीर वाटिका में 48 दिवसीय भक्तामर विधान के दसवें दिन आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिगंबर जैन आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज ने कहा कि संसार में व्यक्ति एक-दूसरे को ठगने और लूटने में लगा हुआ दिखाई देता है, लेकिन वास्तविकता में मनुष्य का सबसे बड़ा लुटेरा उसके स्वयं के पंचेंद्रिय विषय-भोग हैं।

आसक्ति से बुद्धि और ज्ञान का क्षय

आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य प्रतिदिन विषय-भोगों के प्रति आसक्त होकर स्वयं को लुटा रहा है। विषय-भोगों में अत्यधिक आसक्ति के कारण बुद्धि भ्रष्ट होती है, ज्ञान क्षीण होता है और धन-संपत्ति का भी नाश होता है। इसलिए व्यक्ति को अपनी इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए।

मोह आध्यात्मिक उत्थान में सबसे बड़ी बाधा

आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य सगे-संबंधियों और सांसारिक वस्तुओं के प्रति इतना आसक्त हो जाता है कि अंतिम समय तक स्नेह और मोह की गांठें उसे बांधे रखती हैं।यही मोह जीव के आध्यात्मिक उत्थान में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।

उन्होंने कहा कि जीवन में विषय-भोगों के पीछे भागने के बजाय गुरु के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। गुरु के मार्गदर्शन का अनुसरण ही मनुष्य को मोह-माया के बंधनों से मुक्त कर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।

अपने उत्थान और पतन का कारण स्वयं मनुष्य

आचार्य श्री ने कहा कि जो व्यक्ति गुरु की हितकारी बातों को स्वीकार कर जीवन में उतारता है, वह आत्मउत्थान की दिशा में आगे बढ़ता है। इसके विपरीत गुरु की हितकारी बातों की अवहेलना करने वाला व्यक्ति अपने पतन का कारण स्वयं बनता है। इसलिए मनुष्य को अपने आचरण और भावों की समीक्षा करते रहना चाहिए।

48 दिवसीय भक्तामर विधान जारी

आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन के निर्देशन एवं बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी ‘बिगुल’ के संचालन में 1 अगस्त से 17 सितंबर 2026 तक 48 दिवसीय भक्तामर विधान भक्ति और धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है।

इस आयोजन में ब्रह्मचारिणी मुन्नी भुआ जी एवं विकास भैया का सहयोग प्राप्त हो रहा है।

आठ पुण्यार्जक परिवारों ने किया पुण्यार्जन

वर्षायोग कमेटी अध्यक्ष सागर मल बोहरा, समाज सेठ भंवरलाल, दिनेश कुमार जैकणावत एवं समाज अध्यक्ष अरविंद पचौरी ने बताया कि सोमवार को भक्तामर विधान पूजन में आठ पुण्यार्जक परिवारों ने सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।

विधान पूजन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में प्रतिष्ठाचार्य पंडित भागचंद जैन, पंडित विशाल जैन एवं पंडित गजेंद्र पटवा का सराहनीय सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।

भक्ति और धर्म प्रभावना का क्रम जारी

धरियावद के महावीर वाटिका स्थित वर्षायोग स्थल पर भक्तामर विधान के माध्यम से प्रतिदिन धर्माराधना, पूजन एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का क्रम जारी है। आचार्य श्री के प्रवचनों से श्रद्धालुओं को विषय-भोगों से विरक्ति, गुरु मार्ग के अनुसरण और आत्मकल्याण की प्रेरणा मिल रही है।