कुण्डलपुर (दमोह)। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास कलश स्थापना का भव्य समारोह किसी व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की जागृत भक्ति, आस्था और बड़े बाबा के अतिशय का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने केवल संपर्क और प्रेरणा का कार्य किया, लेकिन देशभर से इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का स्वतः कुण्डलपुर पहुंचना उनके अंतःकरण में जागृत धर्मभावना का परिणाम है।

बड़े बाबा की प्रभावना और गुरुवर की तप-साधना

मुनिश्री ने कहा कि किसी व्यक्ति ने व्यक्तिगत रूप से सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित नहीं किया, फिर भी देशभर से हजारों श्रद्धालु कुण्डलपुर पहुंच गए। यह बड़े बाबा आदिनाथ भगवान की दिव्य प्रभावना और गुरुवर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की तप-साधना का प्रताप है।

उन्होंने कहा कि मंगल आगमन के अवसर पर संपूर्ण कुण्डलपुर एक विशाल धर्मनगरी के रूप में दिखाई दिया। इसके बाद महा-महा मंगल कलश स्थापना समारोह में उमड़ा जनसैलाब इस दिव्य प्रभाव का दूसरा ऐतिहासिक प्रमाण बना।

धार्मिक आयोजन से राष्ट्रीय महापर्व तक

मुनि श्री समता सागर महाराज ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने चातुर्मास कलश स्थापना को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे आस्था, श्रद्धा और समर्पण के राष्ट्रीय महापर्व का स्वरूप प्रदान कर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु के मन में धर्म, गुरु और बड़े बाबा के प्रति जो भाव जागृत हुए, वही इस समारोह की वास्तविक सफलता है।

साधना और आत्मकल्याण है मुनियों का उद्देश्य

मुनिश्री ने कहा कि मुनियों का उद्देश्य साधना, स्वाध्याय और आत्मकल्याण है। समाज जब ऐसे आयोजनों में सहभागी बनता है, तो उसे धर्म से जुड़ने, प्रेरणा लेने और अपने जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन लाने का अवसर प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि कुण्डलपुर का चातुर्मास कलश स्थापना समारोह देशभर में चर्चा और प्रेरणा का विषय बना है।

देशभर से उमड़े श्रद्धालु

राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ एवं कुण्डलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने बताया कि समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म, गुरु और तीर्थ के प्रति अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया।

नन्हे मंदिर महिला मंडल दमोह दिव्य घोष के साथ निर्यापक मुनि संघ को ज्ञान साधना केंद्र से समारोह स्थल तक लेकर आया।

मंगलाचरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समा

मंगलाचरण की प्रस्तुति सेजल जैन दमोह, जिनशरणं महिला मंडल कांच मंदिर, श्रीमती सुरभि शुभम मोदी, श्रीमती शिखा रचना कुण्डलपुर एवं पटेरा पाठशाला के बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में सिंघई महिला मंडल दमोह, हटा महिला मंडल, कटनी पाठशाला, पथरिया एवं पटेरा महिला मंडल की मनमोहक प्रस्तुतियों को सराहा गया।

महिला मंडलों ने अर्पित किए अर्घ्य

आचार्य श्री की पूजन में अष्ट द्रव्य अर्घ्य समर्पित करने में नवकार आदर्श महिला मंडल, नन्हे मंदिर बालिका मंडल, सेठ मंदिर, जिन शरणं मंदिर, सदगुवां मंदिर, जबलपुर नाका मंदिर, वैशाली नगर मंदिर, नेमी नगर मंदिर, विजयनगर मंदिर, सिंघई मंदिर दमोह, बड़े बाबा महिला मंडल कुण्डलपुर, सुधा कलश मंडल, कांच मंदिर, भाई जी मंदिर, बड़ा मंदिर, नसिया मंदिर, प्रतिभा मंडल पलंदी मंदिर, चौधरी मंदिर, टंडन बगीचा महिला मंडल एवं नवयुवक मंडल कुण्डलपुर सहित विभिन्न मंडलों ने सहभागिता की।

आदीश जैन संगीत मंडल गढ़ाकोटा की स्वर लहरियों के बीच मंडलों ने अर्घ्य समर्पित किए।

आयोजन की सफलता पर जताया आभार

कुण्डलपुर तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार जैन सराफ ने कलश स्थापना समारोह में पधारे भारतवर्ष की संपूर्ण जैन समाज का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि आयोजन की सफलता में सभी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, दानदाताओं एवं श्रद्धालुओं का समर्पण सराहनीय रहा। सभी के सहयोग से यह समारोह ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय बन सका।