नौगामा। आदिनाथ मंदिर, श्री 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर एवं सुखोदय तीर्थ नसियाजी में पर्युषण महापर्व के अंतर्गत दशलक्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ की गई। इस अवसर पर पुष्पदंतनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।

प्रातःकाल विशेष अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ श्रीजी को पंडाल में लाकर सिंहासन पर विराजमान किया गया। अभिषेक का प्रथम सौभाग्य विपुल कुमार पंचोली एवं लक्ष्मीलाल को प्राप्त हुआ।

देव-शास्त्र-गुरु से दशलक्षण पूजन तक हुई आराधना

गीतकार राजेंद्र जैन, अभिषेक शास्त्री, रमेश चंद्र गांधी एवं वीना दीदी के सान्निध्य में वाद्य यंत्रों के साथ देव-शास्त्र-गुरु पूजन, सरस्वती पूजन एवं दशलक्षण पूजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर गरबा नृत्य भी किया।

पूजन के बाद नवयुवक मंडल द्वारा तत्त्वार्थसूत्र का वाचन किया गया। दोपहर में जैन भूगोल विषय पर प्रवचन हुआ।

‘लोभ और इच्छाएं व्यक्ति को अनुचित कार्यों की ओर ले जाती हैं’

उत्तम शौच धर्म पर मंगल प्रवचन में भैया जी ने कहा कि लोभ सभी पापों की जड़ है। मनुष्य लोभ और इच्छाओं के वशीभूत होकर कई बार अनुचित कार्य कर बैठता है।

उन्होंने कहा कि उत्तम शौच केवल बाहरी स्वच्छता का विषय नहीं, बल्कि मन के भीतर निर्मलता धारण करने की प्रेरणा देता है। लोभ और अनावश्यक इच्छाओं को कम कर संतोष की ओर बढ़ना ही जीवन में शुचिता को मजबूत करता है।

उन्होंने संदेश दिया—“मन में निर्मलता को धारे, शौच धर्म स्वीकार करें।”

पुष्पदंतनाथ भगवान को समर्पित किया निर्वाण लाडू

नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में विशेष आराधना हुई और श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू समर्पित किया। मोक्ष कल्याणक के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भगवान के गुणों का स्मरण करते हुए आत्मकल्याण की भावना की।

भक्तामर स्तोत्र के 48 दीपों से महाआरती

सायंकाल मंदिरजी में भक्तामर स्तोत्र के 48 दीप प्रज्ज्वलित कर महाआरती की गई। इसके बाद शनिवार की परंपरा के अनुसार सुखोदय तीर्थ में भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा के समक्ष गीतकार राजेंद्र कुमार के मधुर स्वरों में भक्ति संध्या एवं महाआरती हुई।

महाआरती का प्रथम सौभाग्य विमल कुमार पंचोली, सागरमल पंचोरी एवं परवीन अमृतलाल को प्राप्त हुआ।

रविवार को होगा सम्मेद शिखर पूजन विधान

जैन समाज अध्यक्ष विपुल पंचोली ने बताया कि रविवार को प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी सुखोदय तीर्थ में सम्मेद शिखर पूजन विधान आयोजित किया जाएगा।

इसमें 24 टोंक, गुफाओं एवं मुख्य मंदिर में भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा के समक्ष अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। विधान के विभिन्न पात्रों का चयन बोली के माध्यम से किया गया है।

नेमी-राजुल नाटिका का मंचन

धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मनीषा नानावटी के सान्निध्य में नेमी-राजुल नाटिका का मंचन किया गया। धार्मिक कथा के माध्यम से वैराग्य और त्याग का संदेश दिया गया।