आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के नए उत्तराधिकारी निर्यापकाचार्य मुनि श्री समय सागर महाराज जी 22 फरवरी को छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया जाएगा। मालूम हो कि मुनि समय सागर महाराज आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के प्रथम शिष्य हैं। पढ़िए श्रीफल जैन न्यूज की संपादक रेखा जैन की विशेष रिपोर्ट...
इंदौर। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के नए उत्तराधिकारी निर्यापकाचार्य मुनि श्री समय सागर महाराज जी 22 फरवरी को छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया जाएगा। मालूम हो कि मुनि समय सागर महाराज आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के प्रथम शिष्य हैं। उन्होंने 18 दिसंबर, 1975 को दतिया जिले के सोनागिरी में क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण की। इसके बाद 31 अक्टूबर, 1978 को एलक दीक्षा जैन सिद्ध क्षेत्र नैनागिरी जी, जिला छतरपुर (मध्य प्रदेश) में हुई। उनकी मुनि दीक्षा 8 मार्च,1980 को जैन सिद्ध क्षेत्र द्रोणगिरी जी, छतरपुर (मध्यप्रदेश) में हुई थी।आचार्य श्री के हैं सबसे छोटे भाई
मुनि समय सागर महाराज की वर्तमान आयु 65 साल है। उन्होंने 2 मई,1975 को ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया था। आपका जन्म कर्नाटक के बेलगांव जिले के सदलगा में 27 अक्टूबर, 1958 को हुआ था। आपका लौकिक नाम शांतिनाथ था। पिता का नाम श्री मल्लप्पाजी अष्टगे (मुनिश्री मल्लिसागरजी), माता का नाम श्रीमती श्रीमंतीजी (आर्यिका श्री समयमतिजी) है। आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के गृहस्थ अवस्था में छह भाई -बहन थे। उनमें से मुनि श्री समय सागर महाराज सबसे छोटे भाई हैं।
ऐसी चर्या का करते हैं पालनमुनि समय सागर महाराज आहार में नमक नहीं लेते। मात्र तीन सब्जी लेते हैं, चौदस को उपवास करते है और दो महीने में केशलोचन करते हैं।
यही है आगमआचार्य श्री विद्यासागर महाराज में 6 फरवरी को अपना आचार्य पद छोड़ दिया और अपना उत्तराधिकारी मुनि समय सागर महाराज को घोषित कर दिया था। इसलिए उन्हें आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया जा रहा है। आचार्य अपना पद जिन्हें देना चाहें उन्हें दे सकते हैं। संघ के सभी साधुओं को उस आज्ञा का पालन करना होता है, यही आगम कहलाता है।




