महरौनी। दशलक्षण महापर्व के अवसर पर श्री अजितनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में धर्म-साधना के साथ संस्कारों की भी गूंज सुनाई दे रही है। प्रतिदिन सुबह जिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं दशलक्षण धर्म की आराधना हो रही है, वहीं शाम को पाठशाला के बच्चे धार्मिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का संदेश दे रहे हैं।

‘मॉडर्न बहू बनी संस्कारी बहू’ ने खींचा ध्यान

जैन पाठशाला के बच्चों ने ‘मॉडर्न बहू बनी संस्कारी बहू’ विषय पर नाटिका प्रस्तुत की। बच्चों ने अभिनय के माध्यम से आधुनिक जीवनशैली के बीच पारिवारिक और धार्मिक संस्कारों के महत्व को सामने रखा।

नाटिका में परिवार में आपसी सम्मान, बड़ों के प्रति आदर, सेवा भावना और संस्कारों को व्यवहार में उतारने का संदेश दिया गया। बच्चों की प्रस्तुति को श्रद्धालुओं ने सराहा और तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।

आधुनिकता के साथ संस्कारों का संतुलन

नाटिका के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आधुनिक जीवनशैली अपनाने के साथ परिवार के संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को भी बनाए रखा जा सकता है। नई पीढ़ी आधुनिक शिक्षा और बदलते समय के साथ आगे बढ़े, लेकिन बड़ों का सम्मान, सेवा, विनम्रता और परिवार के प्रति जिम्मेदारी जैसे संस्कार भी जीवन का हिस्सा बने रहें।

मन और भावों की शुद्धि है उत्तम शौच—मुनि विकौशल सागर

दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत धर्मसभा में मुनि श्री विकौशल सागर जी महाराज ने उत्तम शौच धर्म का विवेचन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को बाहरी स्वच्छता के साथ अपने विचारों और भावों की शुद्धि पर भी ध्यान देना चाहिए।

लोभ, लालच और अनावश्यक इच्छाएं मन को अशांत करती हैं। वास्तविक शौच धर्म भीतर की निर्मलता और संतोष के भाव से जुड़ा है।

मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन करते हुए जीवन में संयम, संतोष और सद्भाव अपनाने की प्रेरणा दी।

सुबह अभिषेक-पूजन, शाम को भक्तामर पाठ

श्री अजितनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में प्रतिदिन प्रातः जिन अभिषेक, शांतिधारा और दशलक्षण पूजन में श्रद्धालु उत्साह से सहभागिता कर रहे हैं।

शाम को आरती के साथ भक्तामर स्तोत्र का सामूहिक पाठ किया जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सहभागिता से मंदिर में पूरे दिन धर्ममय वातावरण बना हुआ है।

यशोदय तीर्थ में भी धर्म आराधना

दशलक्षण महापर्व पर श्री यशोदय तीर्थ में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। श्रद्धालु प्रतिदिन पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो रहे हैं। शाम को आरती और भक्तामर स्तोत्र पाठ के माध्यम से धर्म आराधना की जा रही है।

दशलक्षण महापर्व के चलते नगर के जिनालयों में सुबह से शाम तक पूजा, पाठ, स्वाध्याय एवं धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का क्रम जारी है।