महरौनी। ललितपुर रोड स्थित श्री कुंदकुंद दिगंबर जैन स्वाध्याय मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित श्री दिगंबर जैन महावीर पंच बालयती जिनालय में दशलक्षण महापर्व श्रद्धा, साधना और सामूहिक क्षमावाणी पर्व के साथ संपन्न हुआ।

प्रतिदिन हुई दस धर्मों की आराधना

पर्व के दौरान प्रतिदिन प्रातः श्री जिनेंद्र प्रक्षाल, अभिषेक एवं जिनेंद्र पूजन के साथ श्री दशलक्षण महामंडल विधान आयोजित किया गया। फुटेरा दमोह से पधारे पंडित जितेंद्र जैन ने श्री तत्त्वार्थ सूत्रजी (मोक्षशास्त्र) के आधार पर त्रिलोक की चर्चा तथा बाल ब्रह्मचारी रविंद्र आत्मन के आध्यात्मिक पत्रों पर आधारित स्वानुभव पत्रावली का सारगर्भित विवेचन किया।

उन्होंने कहा कि धर्म दस प्रकार के नहीं, बल्कि धर्म के दस लक्षण हैं, जो आत्मा के आश्रय से प्रकट होते हैं। क्रोध, मान, माया, लोभ, असत्य और असंयम जैसे विकारी भावों से मुक्ति का उपाय आत्मआराधना है।

रात्रि में हुई धार्मिक चर्चा

प्रतिदिन रात्रि में श्री जिनेंद्र भक्ति के साथ उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य धर्म पर चर्चा हुई। यह चर्चा आचार्य समंतभद्र रचित श्री रत्नकरंड श्रावकाचार तथा पंडित द्यानतराय की दशलक्षण पूजा के आधार पर की गई।

जलविहार में परिवारों ने प्राप्त किया सौभाग्य

पर्व के अंतिम दिन श्रीजी का जलविहार आयोजित हुआ। श्रीजी के अभिषेक का सौभाग्य पंडित जिनेंद्र जैन फुटेरा परिवार, आनंद जैन दाऊ परिवार, आनंद चौधरी बानपुर परिवार, कैलाशचंद्र-पुष्पेंद्र चौधरी परिवार, सुरेश जैन मेंगुवा परिवार, राजकुमार सिंघई परिवार एवं रविंद्र गुंदरापुर परिवार को प्राप्त हुआ।

युवा विद्वान ज्ञाता सिंघई सिवनी, अर्पित शास्त्री खनियाधाना, आशीष शास्त्री, निशंक शास्त्री तथा संजय जैन हल्ले भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

हृदय से मांगी परस्पर क्षमा

दशलक्षण पर्व के पश्चात सामूहिक क्षमावाणी पर्व मधुर एवं आत्मीय वातावरण में संपन्न हुआ। सकल दिगंबर जैन समाज महरौनी के अध्यक्ष पवन मोदी एवं उपाध्यक्ष अंकित चौधरी की अध्यक्षता में श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से हुई भूलों के लिए पहले देव-शास्त्र-गुरु और फिर एक-दूसरे से हृदयपूर्वक क्षमा याचना की।

आयोजन में सहभागिता

ट्रस्ट मंत्री कैलाशचंद्र चौधरी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम संयोजक सत्येंद्र जैन गोलू, आशीष चौधरी, विनय सिंघई, अनुराग जैन गुढ़ा और रीतेश गुंदरापुर रहे। आयोजन में ट्रस्ट परिवार एवं सकल जैन समाज का सहयोग रहा।

श्रीफल साथी : राजीव सिंघई