मड़ावरा (ललितपुर)। जैन धर्म के प्रमुख दस दिवसीय पर्युषण अर्थात दशलक्षण महापर्व के सानंद समापन पर शुक्रवार को कस्बा मड़ावरा में भव्य विमान शोभायात्रा निकाली गई। मंद-मंद बारिश के बीच सुसज्जित विमानों में विराजमान जिनेंद्र भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा।
आठ विमानों के साथ निकली शोभायात्रा
शोभायात्रा का शुभारंभ पुराना बाजार स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से हुआ। गाजे-बाजे के साथ निकली यात्रा में नगर के विभिन्न मंदिरों के विमान क्रमशः शामिल होते गए। शोभायात्रा में कुल आठ विमान शामिल रहे।
सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से थाना मड़ावरा पुलिस बल भी शोभायात्रा के साथ मौजूद रहा।
विद्याविहार परिसर में हुआ अभिषेक-शांतिधारा
विमान शोभायात्रा कस्बे के मुख्य मार्गों से होती हुई श्री महावीर विद्याविहार परिसर पहुंची। वहां आचार्य विद्यासागर देशनागृह में बने स्थायी मंच पर सभी विमानों को विराजमान किया गया।
सौभाग्यशाली पुण्यार्जक परिवारों ने विधि-विधानपूर्वक जिनेंद्र भगवान के मस्तक पर अभिषेक एवं शांतिधारा कर पुण्यार्जन किया।
नवीन जिनालय निर्माण के लिए एकता का संदेश
वर्ष 2026 के चातुर्मासकाल में मड़ावरा में विराजमान मुनि नीरजसागर महाराज एवं मुनि निर्मदसागर महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। मुनिश्री ने अनंत चतुर्दशी एवं दशलक्षण महापर्व की महिमा बताते हुए विद्याविहार में बनने वाले नवीन पाषाण जिनालय के निर्माण के लिए समाज को एकजुट होकर कार्य करने का संदेश दिया।
उत्तम क्षमा के भाव से हुई क्षमापना
दशलक्षण पर्व के समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे से उत्तम क्षमा का भाव व्यक्त किया और बीते समय में जाने-अनजाने हुई त्रुटियों के लिए क्षमायाचना की।
इसके पश्चात श्रीजी की प्रतिमाओं को पुनः विमानों में ससम्मान विराजमान कर नगर परिक्रमा कराई गई तथा गाजे-बाजे के साथ उन्हें संबंधित मंदिरों में विराजमान कराया गया। कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज एवं क्षेत्रीय समाज के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
एक नजर में
दशलक्षण महापर्व के समापन पर आठ विमानों की शोभायात्रा निकली।
यात्रा श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई।
विद्याविहार परिसर में अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई।
मुनि नीरजसागर एवं मुनि निर्मदसागर का सान्निध्य मिला।
श्रद्धालुओं ने उत्तम क्षमा के भाव से परस्पर क्षमापना की।
राजीव सिंघई




