कुचामन सिटी। दिगंबर जैन समाज के आत्मशुद्धि, संयम और सद्गुणों की साधना के पर्व दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत शनिवार को उत्तम शौच धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आराधना की गई। इस अवसर पर भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक पर पंचकल्याणक विधान का आयोजन कर निर्वाण लाडू समर्पित किया गया।
लोभ का त्याग और संतोष अपनाने का संदेश
उत्तम शौच धर्म मन, वचन और कर्म की पवित्रता के साथ अंतरंग भावों की शुद्धि का संदेश देता है। मन में उत्पन्न लोभ, लालच, तृष्णा, मोह और विषय-वासनाओं को कम करने का पुरुषार्थ इसकी साधना से जुड़ा है।
धन, संपत्ति, वस्तुओं और भौतिक सुख-सुविधाओं के प्रति अत्यधिक आसक्ति मन में अशांति और असंतोष को बढ़ा सकती है। उत्तम शौच धर्म लोभ का त्याग, संतोष का भाव और आत्मा के गुणों की ओर दृष्टि रखने की प्रेरणा देता है।
भगवान महावीर मंदिर में अभिषेक-शांतिधारा
डीडवाना रोड स्थित श्री 1008 भगवान महावीर मंदिर में प्रातः 6:15 बजे जलाभिषेक के बाद शांतिधारा हुई।
शांतिधारा का पुण्यार्जन सुरेंद्र कुमार-शौरभ काला परिवार, भंवरलाल-आशीष झाझरी परिवार, ज्ञानचंद-अनुभव कुमार गोधा परिवार, राजेश कुमार-मनोज गोधा परिवार तथा सुभाष चंद-प्रतीक-नैतिक पहाड़िया कुचामन-जयपुर परिवार को प्राप्त हुआ।
पुष्पदंत भगवान के मोक्ष कल्याणक पर पंचकल्याणक विधान
भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर पंचकल्याणक विधान श्रद्धापूर्वक किया गया। श्रद्धालुओं ने कलश स्थापित कर भगवान की पूजा-अर्चना की।
मुख्य कलश स्थापित करने एवं मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू चढ़ाने का पुण्यार्जन लालचन्द, कमल कुमार, सुभाष चन्द, प्रतीक एवं नैतिक पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ।
चार परिवारों ने विराजमान किए कलश
विधान में चार अन्य कलश विराजमान करने का पुण्यार्जन सुभाष पाटोदी परिवार, भंवरलाल झाझरी परिवार, नवीन कुमार काला परिवार एवं राजेश काला परिवार को मिला।
दशलक्षण धर्म एवं पंचकल्याणक विधान में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर भगवान के गुणों की आराधना की।
बाहरी नहीं, भीतर की पवित्रता की प्रेरणा
उत्तम शौच धर्म का संदेश केवल बाहरी स्वच्छता तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को अपने विचारों और भावों को निर्मल बनाने, इच्छाओं को सीमित करने तथा संतोष को जीवन में स्थान देने की प्रेरणा देता है। दशलक्षण महापर्व के दौरान इसी आत्मशुद्धि के भाव के साथ श्रद्धालु धर्म आराधना कर रहे हैं।




