जयपुर। अभिषेक और शांतिधारा से हुआ शुभारंभ प्रातः नित्य अभिषेक के पश्चात विश्वशांति की भावना से बीजाक्षर युक्त शांतिधारा कराई गई। शांतिधारा का सौभाग्य ललित गोधा, शिखर चंद जैन, पदम जैन बिलाला, कमलेश पाटनी, शुभम जैन आदि को प्राप्त हुआ।
इसके बाद विद्वान शिखर चंद किरण जैन ने साज-बाज के साथ तीर्थंकर नेमिनाथ विधान पूजन कराया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक विधान मंडल पर 64 अर्घ्य समर्पित किए।
कल्याणक केवल उत्सव नहीं, आत्मकल्याण का अवसर
आचार्य श्री आदित्य सागर जी की पूजन के बाद मंगल प्रवचन हुआ। आचार्य श्री ने कहा कि तीर्थंकरों और महापुरुषों के जीवन का वर्णन केवल गुणगान के लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन में परिवर्तन और कर्मक्षय की प्रेरणा के लिए किया जाता है। भगवान नेमिनाथ का जीवन आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की प्रेरणा देता है।
धर्म के लिए निमंत्रण की प्रतीक्षा न करें
आचार्य श्री ने कहा कि जो व्यक्ति देव, शास्त्र और गुरु का सच्चा भक्त है, वह धर्म के लिए निमंत्रण की प्रतीक्षा नहीं करता। जहाँ जिनवाणी का वाचन और गुरु का प्रवचन हो रहा हो, वहाँ सूचना मिलते ही पहुंच जाना चाहिए। ऐसे आध्यात्मिक अवसर बार-बार नहीं आते।
उन्होंने कहा कि मंदिर आने का उद्देश्य केवल पूजा की विधि पूरी करना नहीं, बल्कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसी कषायों को कम कर जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना होना चाहिए। भगवान नेमिनाथ केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि अनुकरणीय भी हैं।
सम्यक् दर्शन, ज्ञान और चरित्र मुक्ति मार्ग के आधार
आचार्य श्री ने कहा कि सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र ही मुक्ति मार्ग के आधार हैं। गुरु के पास केवल धार्मिक क्रियाएं सीखने नहीं, बल्कि जीवन जीने और जीवन से मुक्ति पाने की कला सीखने जाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा—“तुम स्वयं भगवान बन सकते हो।”
मंदिर बने आत्मपरिवर्तन का केंद्
आचार्य श्री के संदेश का सार रहा कि कल्याणक केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मकल्याण का अवसर है। मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि कषायों को शांत कर जीवन को धर्ममय बनाने का केंद्र है। मनुष्य जीवन का सदुपयोग करते हुए कर्मों को क्षीण करने और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
श्रद्धालुओं ने की भगवान नेमिनाथ की आराधना
प्रचार संयोजक राकेश जैन दूरदर्शन ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत भगवान नेमिनाथ विधान पूजन श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान के जन्म कल्याणक की अनुमोदना की।
प्रबंध समिति के अनुसार बुधवार को मंदिर जी में तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक भी श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।



