इंदौर। स्वाद के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर में इन दिनों तस्वीर कुछ बदली हुई है। 56 दुकान हो, राजवाड़ा-सराफा हो या इतवारिया बाजार—जहां आम दिनों में चाट, नमकीन, सैंडविच और दूसरे व्यंजनों के लिए भीड़ दिखाई देती है, वहां पर्युषण-दशलक्षण पर्व के दौरान ग्राहकी पर असर नजर आ रहा है।

इस बदलाव की वजह जानने के लिए श्रीफल समूह की टीम के समूह संपादक रेखा संजय जैन और श्रीफल जैन न्यूज वेब साइट के उसंपादक प्रीतम लखवाल बाजार में उतरे और फूड कारोबारियों से सीधे बात की। दुकानदारों से बातचीत में सामने आया कि पर्व के दौरान जैन समाज के बड़ी संख्या में लोग बाहर का भोजन छोड़ देते हैं। इसका सीधा असर फूड जोन की ग्राहकी पर पड़ता है। अलग-अलग दुकानदारों ने अपने यहां करीब 15 से 25 प्रतिशत तक असर होने की बात कही।

यह तस्वीर केवल बाजार की मंदी की नहीं, बल्कि धार्मिक संयम की भी है। दशलक्षण पर्व में हजारों श्रावक-श्राविकाएं बाहर का भोजन, नाश्ता, फास्ट फूड और जमीकंद का त्याग करते हैं। अनेक परिवार घर में भी भोजन संबंधी विशेष नियम रखते हैं। कोई एकासन कर रहा है, कोई उपवास, तो कोई अपनी क्षमता के अनुसार त्याग और संयम का नियम निभा रहा है।

यानी जिस इंदौर की पहचान स्वाद से है, उसी शहर में इन दस दिनों में संयम स्वाद पर भारी दिखाई दे रहा है।

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56 दुकान : भीड़ कम, पर्यटकों ने संभाल रखी रौनक

श्रीफल की टीम जब शहर के प्रसिद्ध 56 दुकान फूड जोन पहुंची तो आम दिनों के मुकाबले स्थानीय ग्राहकी का असर महसूस हुआ। विजय चाट सेंटर, अग्रवाल नमकीन एवं चाट सेंटर, मधुरम चाट भंडार और सैंडविच की दुकानों पर भी पर्व का प्रभाव नजर आया।

कारोबारियों के अनुसार 56 दुकान पर इंदौर के अलावा बड़ी संख्या में बाहर से पर्यटक भी पहुंचते हैं। इसलिए यहां बाजार पूरी तरह शांत नहीं होता। बाहर के ग्राहक रौनक बनाए रखते हैं, लेकिन स्थानीय जैन परिवारों के बाहर का भोजन छोड़ने से कारोबार पर असर जरूर पड़ता है। दुकानदारों ने यह असर करीब 10 से 20 प्रतिशत तक बताया।

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राजवाड़ा-सराफा : जैन ग्राहकों के नहीं आने का सीधा असर

राजवाड़ा और सराफा की गलियों में भी दशलक्षण का संयम बाजार में दिखाई देता है।

सराफा क्षेत्र के प्रसिद्ध विजय चाट हाउस के संचालक विजय ठाकर ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान दिगंबर जैन समाज के लोग बाहर का खाना लगभग छोड़ देते हैं। इसका असर कारोबार पर भी पड़ता है और ग्राहकी में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक कमी आ जाती है।

इसी क्षेत्र के संगम चाट कॉर्नर के निलेश लोखंडे का कहना है कि श्रावण से दिवाली के बीच त्योहारों के कारण बाजार में सामान्य रूप से भी उतार-चढ़ाव रहता है। पर्युषण के दिनों में जैन समाज के ग्राहकों की संख्या कम होने का असर अलग से दिखाई देता है।

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इतवारिया बाजार : फलाहार बना सहारा, सैंडविच की कतार हुई छोटी

इतवारिया बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग है। यहां फलाहारी सामग्री बेचने वाले दुकानदारों को सामान्य फूड कारोबारियों के मुकाबले कम असर महसूस होता है।

फलाहारी दुकान चलाने वाले पंकज आणिया ने बताया कि इन दिनों ग्राहक जरूर कम होते हैं, लेकिन फलाहारी सामग्री होने के कारण कारोबार पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ता।

वहीं एवी मधुरम सैंडविच के प्रोप्राइटर ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि सामान्य दिनों में सुबह 11 बजे से ही सैंडविच लेने वालों की लाइन लगने लगती है। दोपहर में कई बार ग्राहकों को नंबर तक लगाना पड़ता है, लेकिन पर्युषण के दिनों में तस्वीर बदल जाती है। उनके अनुसार कारोबार पर करीब 10से 15 प्रतिशत तक असर आता है।

बाजार बता रहा—धर्म का नियम घर से निकलकर फूड जोन तक पहुंचा

ग्राउंड रिपोर्टिंग में एक बात लगभग हर बाजार में समान नजर आई—जैन समाज का भोजन संबंधी संयम केवल घर या मंदिर तक सीमित नहीं है, उसका प्रभाव शहर के कारोबार पर भी दिखाई देता है।

दुकानदारों के अलग-अलग आकलन में ग्राहकी पर असर का प्रतिशत अलग है। कुछ ने 10 से 20 प्रतिशत, तो कुछ ने 15 से 20 प्रतिशत तक कमी बताई। बाजार की कुल स्थिति पर पर्यटकों, त्योहारों और सामान्य मौसमी कारोबार का प्रभाव भी रहता है, इसलिए पूरे इंदौर के लिए एक समान प्रतिशत तय करना उचित नहीं होगा।

फिर भी 56 दुकान से राजवाड़ा-सराफा और इतवारिया बाजार तक दुकानदारों की बात एक बिंदु पर मिलती है—पर्युषण-दशलक्षण के दिनों में जैन समाज बाहर के भोजन से दूरी बनाता है और इसका असर फूड मार्केट की ग्राहकी पर साफ दिखाई देता है।

स्वाद के लिए मशहूर इंदौर में यह शायद दशलक्षण का सबसे सहज संदेश भी है—स्वाद सामने है, बाजार सजा है, फिर भी नियम के लिए उसे छोड़ देना ही संयम की परीक्षा है।