आगरा। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, टीचर्स कॉलोनी, जयपुर हाउस में आचार्यश्री सौभाग्यसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में चल रहे दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन गुरुवार को उत्तम मार्दव धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई। दिनभर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, स्वाध्याय, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा।
ध्यान योग साधना से हुई दिन की शुरुआत
प्रातःकाल ध्यान योग साधना शिविर के साथ कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। इसके बाद श्रीजी का अभिषेक एवं मंगल शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने अष्ट द्रव्यों से उत्तम मार्दव धर्म की विशेष पूजन-अर्चना की। भगवान के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
‘मान और अहंकार का त्याग ही मार्दव की सार्थकता’
तत्त्वार्थ सूत्र वाचन के बाद आचार्यश्री सौभाग्यसागर जी महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जीवन में मान, अहंकार और अभिमान का त्याग कर विनम्रता, सरलता एवं सहजता के भाव अपनाना ही उत्तम मार्दव धर्म की सार्थकता है।
आचार्यश्री ने श्रद्धालुओं को मार्दव धर्म के सिद्धांतों को पूजा तक सीमित न रखते हुए अपने दैनिक व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी।
संत भवन में शास्त्र स्वाध्याय, शाम को मंगल आरती
दोपहर में संत भवन में शास्त्र स्वाध्याय का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने जैन आगम एवं दशलक्षण धर्म के सिद्धांतों पर चिंतन किया। सायंकाल श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ श्रीजी की मंगल आरती की।
‘सीता का धैर्य’ नृत्य-नाटिका ने मोहा मन
शांतिनाथ महिला मंडल द्वारा राखी जैन के निर्देशन में ‘सीता का धैर्य’ नृत्य-नाटिका और ‘चंद्रजीवन’ नाटिका सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। धार्मिक प्रसंगों और संस्कारों को मंच पर भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने सराहा।
भक्ति गीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मंदिर का वातावरण आध्यात्मिक और भक्तिमय हो गया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल
इस अवसर पर राकेश जैन पर्देवाले, दीपक जैन, सुबोध जैन पाटनी, विनोद रांवका, अजय जैन, बॉबी जैन, अमित सेठी सहित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं जयपुर हाउस जैन समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




