इंदौर। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ तिरुक्कुरल की रूसी भाषा में अनुवादित प्रति भेंट की। भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर सम्मान देने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस अवसर पर समाजसेवी टीके वेद ने बताया कि जैन समुदाय इस ग्रंथ को कुरल काव्य के रूप में अपना मानता है और जैन परंपरा में इसे अत्यंत सम्मानित ग्रंथ के रूप में देखा जाता है। उनके अनुसार अनेक विद्वानों का मत है कि तिरुक्कुरल के रचयिता महान जैन आचार्य कुंदकुंद स्वामी हैं, जिन्हें दक्षिण भारत में एलाचार्य के नाम से भी जाना जाता है। तिरुक्कुरल को उसकी नैतिक और जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षाओं के कारण तमिल वेद भी कहा जाता है।
यह ग्रंथ किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं
इस ग्रंथ में अहिंसा, शाकाहार, सत्य, करुणा और नैतिक आचरण जैसे सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया गया है, जो जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों के काफी निकट माने जाते हैं। यह ग्रंथ किसी एक धर्म या संप्रदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए जीवन जीने की कला और नैतिक मार्गदर्शन प्रदान करता है।
युवाओं को प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए प्रेरित करेगा
समाजसेवी टीके वेद ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा इस प्राचीन ग्रंथ की रूसी प्रति को विश्व मंच पर भेंट करना भारतीय साहित्य, जैन विरासत और तमिल संस्कृति के वैश्विक प्रसार का प्रतीक है। यह कदम न केवल दो देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए प्रेरित करेगा।




