धरगांव। दशलक्षण पर्व के पावन अंतिम दिवस अनंत चतुर्दशी पर मंदिरजी में भक्ति और श्रद्धा का विशेष वातावरण रहा। इस अवसर पर अभिषेक, शांतिधारा तथा दशलक्षण पर्व के अंतिम लक्षण उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का विशेष पूजन-विधान संपन्न किया गया।
जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान श्री वासुपूज्य के निर्वाण महोत्सव पर श्रद्धालुओं ने अत्यंत भक्तिभाव से निर्वाण लाडू अर्पित कर आराधना की।
इन परिवारों को मिला पुण्यार्जन का सौभाग्य
प्रथम कलश करने का सौभाग्य महावीर धर्मेंद्र जैन, गोगावा परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा का सौभाग्य नरेंद्र कुमार सुमेरचंद जैन, गोगावा को मिला।
भगवान वासुपूज्य को प्रथम निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य पुष्पेंद्र कुमार राजेंद्र जैन को प्राप्त हुआ। समाजजनों ने सभी पुण्यार्जक परिवारों की धर्मभावना की अनुमोदना की।
ढोल-ताशों के साथ महाआरती
संध्याकाल तीर्थंकरों की महाआरती का विशेष आयोजन किया गया। महाआरती का सौभाग्य श्रीमती बसंतीबाई सुमेरचंद जैन, गोगावा परिवार को प्राप्त हुआ।
आरती से पूर्व सौभाग्यशाली परिवार को उनके निवास से ढोल-ताशों एवं मांगलिक बाजों के साथ इंद्र-इंद्राणी के रूप में ससम्मान मंदिरजी लाया गया। महाआरती से मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा।
प्रवचन और संगीतमय भक्ति
आरती के उपरांत शास्त्र प्रवचन आयोजित हुआ, जिसमें विद्वानों ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म और अनंत चतुर्दशी के महत्व पर प्रकाश डाला। देर रात तक चली संगीतमय भक्ति में श्रद्धालुओं ने जिनेंद्र भक्ति का आनंद लिया।
श्रीफल साथी : सन्मति जैन काका





