इंदौर में सुबह मंदिर से जुड़ता है परिवार, सिंगापुर में रह रहा बेटा भी जैन भोजन की व्यवस्था कर निभा रहा पर्व की मर्यादा

श्रीफल की विशेष श्रृंखला ‘दस दिन–दस परिवार’ में आज जानिए इरिस ग्रुप के डायरेक्टर और बिल्डर भरत जैन के परिवार की दशलक्षण दिनचर्या।

काम और बिजनेस की व्यस्तता के बीच दशलक्षण महापर्व के दस दिन भरत जैन परिवार के लिए कुछ अलग होते हैं। इन दिनों परिवार खान-पान में विशेष सावधानी रखता है, बाहर के खाने से दूरी बनाता है और मंदिर ,पूजन व धार्मिक कार्यक्रमों के लिए समय निकालता है। खास बात यह है कि परिवार का बेटा सिंगापुर में रहते हुए भी इन नियमों को निभाने का प्रयास करता है।

श्रीफल समूह की समूह संपादक रेखा जैन से विशेष बातचीत में भरत जैन ने बताया कि दशलक्षण के दौरान वे दिनभर की व्यस्तता के बावजूद भोजन में संयम रखते हैं। शाम को एक समय बैठकर भोजन करते हैं। इसके अलावा जरूरत के अनुसार फल या चाय लेते हैं, लेकिन बाहर का खाना पूरी तरह बंद रहता है। घर पर ही जो उपलब्ध होता है, उसी में नियम और मर्यादा के साथ दिनचर्या चलती है।

सुबह मंदिर में बीतता है परिवार का समय

भरत जैन ने बताया कि उनकी माताजी सुबह करीब छह बजे मंदिर पहुंच जाती हैं और लगभग दस-साढ़े दस बजे तक वहीं रहती हैं। धर्मपत्नी  रितु जैन भी सुबह करीब साढ़े आठ बजे मंदिर जाती हैं और धार्मिक क्रियाओं से जुड़ती हैं।

भरत जैन स्वयं भी समय निकालकर मंदिर पहुंचते हैं। बच्चों की स्कूल की दिनचर्या हो तो वे उसी के अनुसार मंदिर जाते हैं और छुट्टी या समय मिलने पर परिवार के साथ सुबह की धर्म आराधना में शामिल होते हैं। शाम को भी मंदिर जाने का प्रयास रहता है।

इस तरह परिवार में हर सदस्य की दिनचर्या अलग होने के बावजूद दशलक्षण के दौरान मंदिर और धर्म के लिए समय जरूर निकाला जाता है।

बच्चों के लिए भी बाहर का खाना बंद

रेखा जैन से बातचीत में भरत जैन ने बताया कि पर्व के दिनों में बच्चों के खान-पान में भी नियम रहता है। घर के बच्चों के लिए बाहर का भोजन बंद रहता है। स्कूल और दूसरी व्यस्तताओं के कारण उनका मंदिर जाने का समय अलग हो सकता है, लेकिन भोजन की मर्यादा का ध्यान रखा जाता है।

परिवार का प्रयास यह नहीं रहता कि हर सदस्य बिल्कुल एक जैसा नियम ले, बल्कि उम्र और दिनचर्या के अनुसार जो संभव हो, उसका पालन किया जाए। इसी कारण बच्चे भी अपनी क्षमता के अनुसार पर्व के नियमों से जुड़े रहते हैं।

सिंगापुर में बेटे ने खोजी जैन भोजन की व्यवस्था

भरत जैन परिवार के संस्कारों की एक खास तस्वीर सिंगापुर में भी दिखाई देती है। उनका बेटा वहां रह रहा है, लेकिन दशलक्षण के दिनों में उसने अपने भोजन की मर्यादा बनाए रखने के लिए अलग से जैन भोजन की व्यवस्था की है।

भरत जैन ने बातचीत में बताया कि वहां एक जैन महिला के माध्यम से उसे शुद्ध जैन भोजन उपलब्ध हो रहा है। इन दस दिनों में वह वही भोजन ग्रहण करता है। यदि नियम के अनुरूप भोजन उपलब्ध न हो तो बाहर का सामान्य खाना लेने के बजाय उसे छोड़ना पसंद करता है।

परिवार के लिए यह बात महत्वपूर्ण है कि बच्चा घर और देश से दूर रहते हुए भी दशलक्षण में खान-पान के संस्कारों को नहीं छोड़ रहा है।

परिस्थिति अलग, लेकिन परिवार को जोड़ रहे संस्कार

भरत जैन परिवार की दशलक्षण दिनचर्या में हर सदस्य अपनी स्थिति के अनुसार धर्म से जुड़ा है। माताजी सुबह कई घंटे मंदिर में बिताती हैं, परिवार के अन्य सदस्य अपनी दिनचर्या के अनुसार मंदिर जाते हैं, बच्चे बाहर के भोजन का त्याग रखते हैं और सिंगापुर में रहने वाला बेटा भी जैन भोजन की व्यवस्था करके पर्व की मर्यादा निभा रहा है।

समूह संपादक रेखा जैन और भरत जैन के बीच हुई बातचीत में यही बात प्रमुखता से सामने आई कि दशलक्षण में नियम कठिन होने से ज्यादा जरूरी उन्हें अपनी परिस्थिति के अनुसार ईमानदारी से निभाना है। बिजनेस, स्कूल या विदेश में रहने की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन खान-पान में संयम और धर्म के लिए समय निकालने की भावना परिवार को एक ही संस्कार से जोड़ती है।

दशलक्षण के ये दस दिन भरत जैन परिवार के लिए सामान्य दिनचर्या के बीच स्वयं पर थोड़ा नियंत्रण रखने का अवसर बनते हैं—बाहर का खाना छोड़ना, भोजन को सीमित करना, मंदिर के लिए समय निकालना और बच्चों को भी इन्हीं संस्कारों से जोड़कर रखना।