इंदौर। नेमिनगर जैन कॉलोनी में मंगलवार को नेमिनाथ का दरबार साकार हो गया। कॉलोनी में बैंडबाजों, बग्गियों में सवार पुण्यार्थीगणों ने नेमि-राजुल की बारात में भाग लिया। भक्तिगीतों पर गुरु भक्त थिरक रहे थे। श्रद्धालु भगवान नेमिनाथ जी के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। इस अवसर पर प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी ससंघ साथ चल रहे थे। नेमिनगर जैन कॉलोनी के नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पहुंचकर यहां पर नेमि-राजुल के विवाह सहित वैराग्य धारण करने के प्रसंगों के आधार पर नाटिका का भावपूर्ण मंचन किया गया। इस नाटिका को देखकर सभा में उपस्थित श्रद्धालुगण भाव विभोर हो गए। इसके बाद चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन करने के लिए मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री मिश्रीलाल गंगवाल परिवार के निर्मल इंद्रा गंगवाल, किशोर शाह, महावीर झांझरी, मनीष काला मोनू भैया, सुदर्शन जटाले, सुनील जैन 78 नंबर, कैलाश मीना पाटनी, इंदर सेठी, कैलाश लुहाड़िया, प्रदीप सेठी, देवेंद्र सेठी आदि मौजूद रहे।
सांसों की डोर कच्ची है, सोचिए कहां तक जाना है
भगवान नेमिनाथ के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसों की डोर कच्ची है। सोचिए कहां तक जाना है। वैराग्य करना इतना आसान नहीं है। कभी ऐसे भी विचार कीजिए जैसे राजुल ने किया। आचार्यश्री ने कहा कि संबंध नौ भवों तक बना रहता है। इस राग को छोड़ना इतना आसान नहीं है। दुनिया में कोई ही नेमिनाथ होता है। उन्होंने कहा कि अंततः वैराग्य जीवों के कल्याण में आम आता है। हरिवंश पुराण पर अगर कोई फिल्म बने तो धर्मप्रेमियों को सन्मार्ग पर आगे बढ़ने की शिक्षा मिल सकती है। आचार्य श्री सुनीलसागर जी ने धारण, बलभद्र, नारद जैसे शलाका पुरुषों की उपस्थिति के बारे में बताया। उन्होंने कृष्ण जरासंध युद्ध, समुद्र विजय सहित 10 भाइयों की कथा का रसपान करवाया। द्वारिका सूरसेन नगर सहित का वर्णन किया गया। आचार्यश्री ने राजुल के त्याग को दुनिया में सबसे बड़ा त्याग बताया।
19 को बनेगी सम्मेद शिखर की प्रतिकृति
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक मोक्ष सप्तमी पर विशेष कार्यक्रम किया जाएगा। 23 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर नेमिनगर जैन कॉलोनी स्थित धर्मसभा पांडाल में सम्मदे शिखर जी की प्रतिकृति बनाई जाएगी।



