जो लोग आप को भोजन करा रहे हैं, वे लोग न जाने कितने जतन करके आपके लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। उनका सम्मान आपके द्वारा भोजन नहीं छोड़ना है। इससे आप किसी अन्य व्यक्ति का भी पेट भरते हैं, जिससे आपको भी पुण्य लगता है। साथ में किसी भी व्यसन में पड़कर आप इस प्रकार के हालात पैदा कर लेते हैं कि आपको भोजन की समस्या का सामना करना पड़ता है।
इसलिए सभी प्रकार के व्यसन का आप सभी लोगों को त्याग करना चाहिए। उन्होंने सभी दानदाता और अन्नपूर्णा सेवा संघ के कार्य सेवकों को दोनों हाथों से आशीर्वाद प्रदान किया तथा भोजन देख कर कहा कि इतना शुद्ध भोजन निश्चित रूप से मरीजों के लिए भी लाभदायक है और अन्य भी जो लोग खा रहे हैं, उनके लिए भी लाभदायक है।



