धरियावद। अड़तालीस दिवसीय भक्तामर विधान आराधना के छत्तीसवें दिवस मंगलवार को दस पुण्यार्जक परिवारों ने भक्ति भावपूर्वक एवं संगीतमय वातावरण में विधान में सहभागिता करते हुए मंडप पर भक्तामर के 48 अर्घ समर्पित किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं आराधना में भावपूर्वक सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।
साधु समाधि भावना का महत्व
वधान के पश्चात आयोजित प्रवचन श्रृंखला में परम पूज्य आचार्य कल्प पुण्यसागर जी महाराज ने सोलहकारण पर्व के अंतर्गत साधु समाधि भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तीर्थंकर पद की प्राप्ति के लिए सोलह भावनाओं का चिंतन-मनन और भावन करना आवश्यक है। इन्हीं सोलह भावनाओं में एक महत्वपूर्ण भावना साधु समाधि भावना है।
अंतिम समय में आत्मभाव जरूरी
आचार्यश्री ने कहा कि साधु समाज प्रतिदिन अनेक बार समाधि भावना का चिंतन करता है, ताकि जीवन के अंतिम क्षणों में भी मन की




