भव्यात्माओं! कथनी और करनी में फर्क नहीं होना चाहिए। जिन शासन इतना सस्ता नहीं है। अगर आत्मा को जानना है तो जिनके पीछे सब छोड़ा है, उसको स्वीकार करो। संभावनाएं, संभावनाएं हैं वास्तविकता तो वर्तमान हैं। संभावना को वास्तविक करना आपके स्वयं के हाथ में है। संभावना आपके दिमाग में पले, उससे पहले अपनी आत्मा को इतना पावरफुल बना दो कि संभावनाओं के लिए कोई जगह ना रहे। भगवान महावीर कहते हैं क्यों मूर्ख बनता है? तू तो अनंतगुणों का धारी है, तू योग्य है चैतन्य है फिर क्यों सम्भावनाओं को, वास्तु को, दोषों को जगह देता है। तू स्वयं को बदल ले सारे वास्तु दोष दूर हो जाएंगे।




