बांसवाड़ा। परम चमत्कारी भगवान अडिन्दा पारसनाथ के पादमूल में 42वें अभिनंदनीय वर्षायोग के लिए ससंघ विराजमान आगमिक प्रखर वक्ता एवं चर्या शिरोमणि गणिनी आर्यिका रत्न श्री सुभुषणमति माताजी ने श्रावक-श्राविकाओं द्वारा मूलनायक भगवान के पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत अभिषेक की महिमा पर मंगल प्रवचन दिया।

अभिषेक की प्राचीन परंपरा

गणिनी आर्यिका सुभुषणमति माताजी ने कहा कि जिनेंद्र भगवान का अभिषेक तीर्थंकरों द्वारा प्रणीत और पूर्वाचार्यों द्वारा संवर्धित अनवरत परंपरा है। आचार्य कुंदकुंद देव ने नियमसार में देवपूजा, गुरु-उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप और दान को गृहस्थ के प्रमुख कर्तव्यों के रूप में बताया है।

गृहस्थ जीवन में पूजा का महत्व

माताजी ने कहा कि गृहस्थ जीवन में व्यक्ति सुबह से शाम तक अनेक प्रकार के कार्यों में प्रवृत्त रहता है। मन, वचन और काय से होने वाली गतिविधियों के कारण निरंतर कर्मों का आस्रव होता रहता है। ऐसे में आत्मचिंतन, स्वाध्याय और जिनेंद्र भगवान की आराधना जीवन को शुद्ध दिशा प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि स्वाध्याय में एकाग्रता नहीं बन पाने की स्थिति में प्रतिदिन भगवान का अभिषेक और पूजन पापास्रव के निवारण का सरल माध्यम बन सकता है।

प्रतिदिन एक कलश अभिषेक का संदेश

गणिनी आर्यिका सुभुषणमति माताजी ने श्रावक-श्राविकाओं से आह्वान किया कि वर्तमान जीवन को संवारने और आगामी भव को सुधारने के लिए 24 घंटे में मात्र 10 मिनट प्रातःकाल निकालकर एक कलश से श्रीजी का अभिषेक अवश्य करें।

उन्होंने प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि एक कलश में इतनी शक्ति है कि वह भक्त के जीवन को भी कलश की तरह मंगलमय बना सकता है।

आगमिक वाणी से प्रभावित हुए श्रद्धालु

गणिनी आर्यिका श्री सुभुषणमति माताजी की आगमिक वाणी एवं प्रवचन शैली से श्रद्धालु भावविभोर हो गए। धर्मसभा में उपस्थित भक्तों ने गुरु मां के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

स्वाध्याय और आत्मशुद्धि पर जोर

माताजी ने धर्म के साथ नियमित स्वाध्याय और आत्मचिंतन को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि बाहरी पूजा के साथ आत्मा के भीतर होने वाले परिवर्तन पर भी ध्यान देना आवश्यक है। अभिषेक केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि एवं शुभ भावों को जागृत करने का माध्यम है।

भक्तों ने व्यक्त की श्रद्धा

धर्मसभा के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं ने गणिनी आर्यिका श्री सुभुषणमति माताजी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और वंदामी-वंदामी कहते हुए मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर अडिन्दा पारसनाथ क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा।