सनावद। पिछले छह दशकों में सनावद नगर से अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने गृहस्थ जीवन का वैभव, मोह-माया और सांसारिक आकर्षण छोड़कर त्याग एवं संयम का मार्ग अपनाया है। अब सनावद निवासी 81 वर्षीय मनोरमा जैन भी जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने जा रही हैं।
आचार्य वर्धमान सागर जी से लेंगी दीक्षा
सन्मति जैन काका ने बताया कि दो प्रतिमाधारी मनोरमा जैन, स्वर्गीय निर्मल कुमार जैन की धर्मपत्नी हैं। वे श्रमण संस्कृति के त्याग एवं संयम के पथ पर आगे बढ़ते हुए पंचम पट्टाचार्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के वरद करकमलों से सीकर, राजस्थान में शुभ मुहूर्त में जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी।
19 अगस्त को भव्य दीक्षा महोत्सव
भगवान पार्श्वनाथ के जन्म कल्याणक एवं मुकुट सप्तमी के अवसर पर श्रावण शुक्ल सप्तमी को सीकर में वृहद दीक्षा महोत्सव आयोजित होगा। मनोरमा जैन के साथ क्षुल्लक प्राप्ति सागर जी, क्षुल्लक प्रतिज्ञा सागर जी, क्षुल्लिका प्रदीप्त माताजी, नवरत्न पाटनी जयपुर, शकुंतला देवी कोठिया एवं महावीर प्रसाद जैन भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से अपूर्णता के नाश एवं आत्मशुद्धि के उद्देश्य से व्रत धारण कर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगे।
सनावद से पहले 18 विभूतियां संयम पथ पर
सनावद नगर से पूर्व में यशवंत पंचोलिया, मोतीचंद पंचोलिया, तिलोकचंद पंचोलिया, नरेंद्र कुमार पंचोलिया, चंदना पंचोलिया, सिद्धा पंचोलिया, श्रीचंद जैन, राजेंद्र जैन, विजय कुमार जैन, श्रेयांस जैन, स्वतंत्र कुमार जैन, दीप्ति जैन, कमला बाई पंड्या (काकीजी), अर्चना जैन, ऊषा जैन, मधुबाला सराफ, संदेश जैन और रतनलाल पाटनी सहित 18 विभूतियां त्याग एवं संयम का मार्ग अपना चुकी हैं।
मनोरमा जैन की दीक्षा के साथ सनावद नगर से संयम मार्ग अपनाने वाली विभूतियों की संख्या 19 हो जाएगी।
लोनारा में जन्म, सनावद में गृहस्थ जीवन
मनोरमा जैन का जन्म ग्रामीण कस्बे लोनारा में हुआ। सनावद की बहू बनने के बाद उन्होंने गृहस्थ जीवन में धर्म एवं संस्कारों का पालन किया। अब जीवन के इस पड़ाव पर उन्होंने संसार की मोह-माया का त्याग कर आत्मकल्याण के लिए जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करने का संकल्प लिया है।
सीकर पहुंचा धर्मावलंबियों का समूह
दीक्षा से पूर्व होने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता के लिए मनोरमा जैन सीकर पहुंच चुकी हैं। दीक्षा के पश्चात गुरु सान्निध्य में उन्हें नया नाम एवं नई पहचान प्राप्त होगी। सीकर में होने वाले दीक्षा महोत्सव में सनावद सहित पीथमपुर, लोनारा, महेश्वर, इंदौर, खरगोन एवं मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों से जैन धर्मावलंबी पहुंचकर इस मंगल अवसर के साक्षी बनेंगे।
बिनौरी निकालकर की अनुमोदना
मनोरमा जैन के दीक्षा ग्रहण करने के संकल्प पर निमाड़-मालवा के अनेक नगरों में हर्षोल्लास के साथ उनकी बिनौरी निकाली गई। समाजजनों ने उनका सम्मान करते हुए त्याग एवं संयम के पथ पर आगे बढ़ने की अनुमोदना की।




