आचार्य श्री विराग सागर जी, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिदिन निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण भाव से 10 दिवस से किया जा रहा है। जयपुर से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की खबर…
जयपुर। आचार्य श्री विराग सागर जी, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज की शिष्या गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी संघ के सानिध्य में प्रतिदिन निर्माण नगर पार्श्वनाथ कॉलोनी के जिनालय में जिन सहस्त्रनाम धारा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण भाव से 10 दिवस से किया जा रहा है। इसमें भगवान जिनेंद्र देव के 1008 पवित्र नामों का उच्चारण किया जाता है। अध्यक्ष मुकेश नागैसरिया, सचिव पदमचंद गंगवाल मीठडी ने बताया कि माताजी के सानिध्य में सुबह कलशाभिषेक, शांतिधारा, जिन सहस्त्रनाम धारा, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, जिनवाणी भेंट, पाद प्रक्षालन, प्रवचन आदि हो रहे हैं। दोपहर में धार्मिक कलश, सायंकाल आरती, प्रश्नमंच और आनंद यात्रा में श्रावक-श्राविकाएं बढ़-चढकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
विधान के पात्रों का चयन किया
रमेशचंद गोधा ने बताया कि माताजी के सानिध्य में जून रविवार को संगीतमय (माताजी द्वारा रचित 1008 अर्घ्यों वाला) जिन सहस्त्रनाम विधान आयोजित किया जाएगा। जिसके पात्रों का चयन हुआ। जिसमें सौधर्म चक्रवर्ती, यज्ञनायक कुबेर मुख्य कलशों के पुण्यार्जक और दीप प्रज्वलन के पात्रों का चयन हुआ। जिसमें सभी श्रावक श्राविकाओं ने धार्मिक लाभ लेने के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की। मंच संचालन रमेशचन्द गंगवाल ने किया।













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