धर्म सभा में दिए उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन : लोभ छोड़ो, शौचधर्म स्वीकारो - आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी
पापों का पिता कोई है तो वह लोभ है । लोभ बड़ा खतरनाक होता है। लोभ अनर्थकारी होता है। लोभ सर्व- अनर्थो का मूल कारण है। लोभ ही पाप, हिंसा, मान, मायाचारी, चोरी, कुशील करवाता है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह विशेष रिपोर्ट... "पर्वराज पर्युषण महापर्व" पर आयोजित " श्रावक संस्कार संयम शिव
इंदौर • Shreephal Jain News • 11-09-2024, 10:46 pm





















