धर्मसभा में दिए प्रवचन : धर्म वीतराग विज्ञान है- आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव
दिगम्बर जैनाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी अंतिम तिर्थेश वर्धमान स्वामी के शासन में विराजते हैं। तीर्थंकर भगवान की पीयूष देशना जिनेंद्रवाणी जगतकल्याणी है। यह सर्वज्ञशासन, नमोस्तुशासन जयवन्त हो। जयवन्त हो वितरागी श्रमणसंस्कृति।आचार्
इंदौर • Shreephal Jain News • 09-10-2024, 06:10 pm





















