जहां त्याग, तपस्या, संयम, शील की बहती निर्मल धारा वो विद्या गुरु हमाराः आचार्य 108 विद्यासागरजी महामुनिराज को नमन
परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागरजी महामुनिराज के प्रथम समाधि दिवस पर उनके पावन चरणों में नमन करते हुवे भावपूर्ण विनयांजलि कविता के रूप में समर्पित है। जो गीत-‘जहां डाल जहां पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा‘ पर आधारित है। पढ़िए कोटा से पारस जैन पार्श्वमणि की यह कविता... ज
इंदौर • Shreephal Jain News • 07-02-2025, 01:40 am





















