कल्प वृक्ष रूप हैं स्वामी रविन्द्रकीर्ति जी: कर्मठता से बने कर्मयोगी
ब्र. रवीन्द्रकुमार जी, जिन्होंने कभी भी किसी भी व्यक्ति को अपने द्वार से निराश नहीं लौटाया। हर व्यक्ति को साथ लेकर चलना एवं हर कार्य को विधिवत पूर्व निर्धारित योजना अनुसार करना ये विशेषता रही है, भाई जी की कार्यशैली अत्यन्त सरल है, जो कठिन से कठिन से कार्य को सरल बना देती है। अयो
इंदौर • Shreephal Jain News • 27-05-2025, 02:26 am





















