सबसे बड़ा शत्रु व्यक्ति के लिए उसका अहंकार है: आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने मंगल प्रवचन में अहंकार त्यागने पर दिया जोर
आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि हम दूसरे को देखकर संतुष्ट नहीं होते हैं। यह हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हो गया है। हम दूसरे को देख ही नहीं पाते हैं। हमारा धर्म कहता है कि मैत्री भाव और गुणीजनों को देखकर प्रेम उमड़ना चाहिए। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन
इंदौर • Shreephal Jain News • 26-07-2025, 01:58 am




















