जब संत मिलते हैं तो सारे जग को खुशी होती है: आचार्य प्रज्ञा सागरजी ने संत मिलन के अवसर पर दी मंगल देशना
मैं जब अपने से बड़ों से मिलता हूं तो क्षीर में नीर की तरह मिलने का प्रयास करता हूं और अपने से छोटों से मिलता हूं तो उन्हें अपने में मिलाने का प्रयास करता हूं क्योंकि क्षीर रूपी बड़ों में मिलकर मुझ पानी की कीमत बढ़ जाती है। यह बात आचार्यश्री प्रज्ञासागर जी महाराज ने कही। कोटा से पढ़िए
इंदौर • Shreephal Jain News • 03-12-2025, 12:50 am





















