महरौनी। श्री विद्यासागर सभागार, अजितनाथ धाम बड़े मंदिर जी में विरागमूर्ति मुनिश्री 108 विकौशल सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में 48 दिवसीय श्री भक्तामर विधान का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विधान में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

अभिषेक, पूजन एवं विधान से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान जिनेन्द्र के विधि-विधानपूर्वक अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा से हुई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भक्तामर विधान संपन्न कराया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।

भक्तामर स्तोत्र आत्मबल और श्रद्धा का स्रोत

अपने मंगल प्रवचन में मुनिश्री विकौशल सागर जी महाराज ने कहा कि भक्तामर स्तोत्र सभी संकटों, भय एवं विघ्न-बाधाओं के निवारण का महामंत्र है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसके पाठ से आत्मबल, सकारात्मक सोच तथा आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।

48 दिनों तक होगा काव्यों का विवेचन

मुनिश्री ने कहा कि भक्तामर स्तोत्र का प्रत्येक काव्य जीवन को धर्म, संयम और सदाचार की ओर प्रेरित करता है। आगामी 48 दिनों तक प्रतिदिन एक-एक काव्य का आध्यात्मिक एवं व्यवहारिक विवेचन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को भक्तामर के गूढ़ रहस्यों को समझने का अवसर मिलेगा।

पुण्यार्जक परिवार एवं आयोजन व्यवस्था

विधान की द्रव्य पूजन सामग्री के पुण्यार्जक राकेश एवं नितिन सतभैया परिवार रहे। आयोजन समिति ने बताया कि प्रतिदिन भक्तामर विधान के साथ मुनिश्री के मंगल प्रवचन भी आयोजित किए जाएंगे।