इंदौर। रक्षाबंधन का पर्व जैन धर्म से जुड़ा है और इसकी शुरुआत अकंपनाचार्य और 700 मुनिराजों के उपसर्ग निवारण प्रसंग से हुई है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिराज विष्णु कुमार ने अपनी विक्रिया रिद्धि से मुनिराजों पर आए उपसर्ग को दूर किया था। जिन शासन के मयंक जैन ने कहा कि यह पर्व धर्म की सुरक्षा का संकल्प लेने का दिन है। वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने कहा कि रक्षा सूत्र (धागा) केवल भाई-बहन का बंधन नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा का एक संकल्प सूत्र (धागा) है‌ संघ नायक राकेश गोहिल ने कहा कि इस पर्व पर सभी साधर्मी एक-दूसरे को धर्म पर संकट आने पर रक्षा करने का संकल्प देते हैं। अपने बच्चों को रक्षा सूत्र बांधते समय उन्हें धर्म संस्कृति की रक्षा का महत्व और कर्तव्य समझाना चाहिए। दद्दू ने कहा कि आज जैन धर्म संस्कृति,और तीर्थ क्षेत्रों पर लगातार बढ़ रहे संकटों को देखते हुए रक्षा का संकल्प लेने की अत्यधिक आवश्यकता है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने आह्वान कर जैन समाज को संगठित होकर धर्म और मंदिरों के संरक्षण के लिए स्वप्रेरणा से आगे आने की जरूरत है धर्म की रक्षा करते समय हमें अपने मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध के भाव नहीं लाने चाहिए। महिला परिषद् की संभागीय अध्यक्ष मुक्ता जैन ने कहा कि रक्षाबंधन को केवल इवेंट या पार्टी की तरह मनाने के बजाय इसे संकल्प दिवस के रूप में मनाना एवं देखना चाहिए। प्रतिदिन पास के जिन मंदिर में जाना और छुट्टियों में तीर्थ क्षेत्रों पर जाना धर्म के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।

तीर्थ क्षेत्रों पर विनय और संयम का पालन जरूरी

धर्म की प्रभावना के लिए स्वाध्याय करना और जिनागम पढ़ना। चलते फिरते श्रंमण संस्कृति उन्नायक धरती के देवता मुनिराजों की चर्या का पालन करने में सहायता करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा परम कर्तव्य है। अपने तीर्थों की चल अचल संपत्ति की जानकारी और फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करना उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का एक साधन है। संघ ने कहा कि इंटरनेट पर स्पष्ट उल्लेख करने से भविष्य में कोई हमारे तीर्थों पर कब्जा या अधिकार का दावा नहीं कर पाएगा। आओ हम सब मिलकर कर पर्व को संकल्प दिवस के रुप में मनाएंगे यह प्रतिज्ञा लें।