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सारांश:

कुचामन सिटी। डीडवाना रोड स्थित 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ पूजा-विधान संपन्न हुआ। प्रातः 6:30 बजे श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान का कलशाभिषेक किया। इसके बाद भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा हुई।

तप आत्मशुद्धि और संयम की साधना

उत्तम तप धर्म के महत्व पर बताया गया कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का नाम नहीं है, बल्कि इंद्रियों और मन पर संयम रखते हुए आत्मा की शुद्धि करने की साधना है। तप के माध्यम से व्यक्ति इच्छाओं, विषय-वासनाओं और आसक्तियों पर नियंत्रण करना सीखता है।

जैन दर्शन में तप के बाह्य और आभ्यंतर दो रूप बताए गए हैं। उपवास एवं एकासन बाह्य तप हैं, जबकि प्रायश्चित, विनय, वैयावृत्य, स्वाध्याय, व्युत्सर्ग और ध्यान आभ्यंतर तप के रूप हैं। तप से कर्मों की निर्जरा होती है और आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप की ओर अग्रसर होती है।

पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

श्रावक-श्राविकाओं ने देव-शास्त्र-गुरु पूजन, सोलहकारण पूजन, सरस्वती पूजन, दशलक्षण पूजन, दशलक्षण विधान, मूलनायक भगवान महावीर पूजन तथा तप धर्म पूजन भक्ति के साथ किया।

सायंकाल आरती, सामायिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। धार्मिक नृत्य प्रतियोगिता में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

शांतिधारा का सौभाग्य

भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा का सौभाग्य दुलीचंद-सिद्धार्थ डोसी परिवार, विकास कुमार-विशाल कुमार काला परिवार, विनोद कुमार-विनय कुमार झांझरी परिवार तथा रितेश कुमार-नितिन कुमार-विहान लुहाड़िया परिवार, सुरेरा वालों को प्राप्त हुआ।

पूजन में सहभागिता

कमलादेवी पाटोदी, हीरामणी, कुसुम, निधि पाटोदी, कमला देवी झांझरी, शांति देवी, पुष्पा अजमेरा, मंजू संतोष, मुन्नी, ममता, चंदा, पुष्पा, शन्नू, सुशीला, पल्लवी काला, सरला, रेखा, सुलोचना, निर्मला पहाड़िया, सरिता पांड्या, बेबी कासलीवाल, शकुंतला बड़जात्या, मंजू गंगवाल एवं संतोष गोधा सहित श्रद्धालुओं ने पूजन में भाग लिया।

श्रीफल साथी : लालचंद पहाड़िया