प्रवक्ता जैन समाज धर्मेन्द्र जैन बताया कि वेबिनार के दौरान गुरुदेव ने आगे कहा कि नरक, निगोद में जाने से बचाने वाले गुरु ही हैं। पंचम काल में तीर्थकाल नहीं है तो गुरु ही आत्मा से परमात्मा बनने के लिए मोक्ष मार्ग बताने वाले होते हैं। अतः तीर्थंकर के लघु नंदन साधु संसार के दुखों में जलते हुए जीवों का उद्धार करते हैं। गुरु के निर्देश बिना ध्यान भी सम्यक नहीं हो सकता। गुरु ही आत्मज्ञान देते हैं। आत्मज्ञान बिना जीव का विकास नहीं होता, इंद्रियों का दमन भी नहीं हो सकता। गुरु आज्ञा बिना प्राथमिक सम्यकदृष्टि भी नहीं बन सकते। जो भव का नाश करें, संसार का नाश करें वह गुरु है। ऐसे गुरु का शासन, आज्ञा, भक्ति को स्वीकार करना चाहिए। गुरु बिना सभी लौकिक सुख, धन संपत्ति, ज्ञान विज्ञान व्यर्थ है। गुरु स्वपद स्वगुण देते हैं। गुरु से ही अनंत, अक्षय सुख प्राप्त करने का मार्ग मिलता हैं।
युवती के पर्सनालिटी गढ़ने के गुरु ब्रम्हा का स्वरुप है व को ज्ञान रूपी अमृत नारायण विष्णु भी - मंत्री धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव

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