आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में जैन धर्म पर आधारित शानदार सत्र आधिकारिक रूप से जारी है। इस पहल का उद्देश्य युवा सोच को प्रेरित करना और जैन दर्शन, मूल्यों, आध्यात्मिकता तथा आत्म-विकास के मार्ग की गहरी समझ प्रदान करना है। रविवार को आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य श्रमण मुनि श्री समत्व सागरजी महाराज, श्रमण मुनि श्री शील सागर जी, श्रमण मुनिश्री सुप्रभात सागर जी ससंघ के सानिध्य में युवा एवं युवतियों और पुरुष एवं महिलाओं को वंडरफुल जैनिज़्म 8 में द अनसीन पावर के बारे में बताया। (हम हर दिन बहुत कुछ देखते हैं लेकिन, क्या आपने कभी उस चीज़ के बारे में सोचा हैं जिसे देखा नहीं जा सकता?)। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन पदाधिकारियों ने किया और बालिका ने मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता से भरपूर यह सत्र इतना प्रभावशाली था कि सभागार आगरा के युवाओं से खचाखच भरा हुआ था। पूरे उत्साह के साथ युवाओं ने एक स्वर में उद्घघोष किया “प्राउंड टू बी ए जैन
वंडरफुल जैनिज्मः प्राउड टू बी ए जैन
संयुक्त धर्मसभा में मुनि श्री समत्व सागर जी द्वारा मार्गदर्शित वंडरफुल जैनिज़्म 8 युवा बदलेगा -समाज बदलेगा विशेष सत्र में ओजस्वी प्रवचन में कहा कि आपका ऐसे ही बार-बार स्वागत है। आज कुछ धर्म के इस अद्भुत कक्षा में और जिसका नाम है, वंडरफुल जैनिज्मः प्राउड टू बी अ जैन। कितना अच्छा मौसम है। यह मौसम अच्छा है कि बुरा है? बहुत अच्छा मौसम है लेकिन, उससे पूछिए जिसको काम पर जाना था और वह काम पर नहीं जा पाया। जो काम पर जाना चाहते थे, वे काम पर नहीं गए। एक को घूमने जाना था इसलिए अच्छा वेदर है। एक को स्कूल नहीं जाना था। उसके लिए अच्छा वेदर था लेकिन, जिसको हॉस्पिटल जाना था और वह बीच में था और जिसको जाना था।
हू इज़ दैट अनसीन पावर
आज समझना बहुत गहरे सिद्धांत की ओर चलना है, क्योंकि देयर इज़ अ अनसीन पावर हू कंट्रोल्स दिस, राइट? हू इज़ दैट अनसीन पावर जो यह सारा कुछ कंट्रोल करती है, जो तुम्हारे लाइफ के ऊपर जो कुछ होता है, वह इस अनसीन पावर के कंट्रोल में होता है। कौन तुम्हारे ऊपर मैजिक करता है? क्या होता है जब तुम नहीं चाहते हुए भी वहाँ फँस जाते हो, जहाँ तुम नहीं चाहते हो? क्या ऐसा नहीं होता है? अच्छा, कितने लोग एग्जाम्स देना चाहते हैं परीक्षा न देना पड़े और रिजल्ट्स अच्छे आ जाएँ, ऐसा कितना अच्छा हो जाएगा ना, कि परीक्षा न देना पड़े और कई बार होता है कि परीक्षा पोस्टपोन हो गई तो भी टेंशन हो जाती है।
अच्छा, भगवान अच्छा करता है कि बुरा करता है, यह बता दीजिए
बिना परीक्षा के पास हो जाएँ, बिल्कुल फर्स्ट ग्रेड में, बड़ा आनंद आ जाएगा ना? क्यों, कंट्रोल तो कौन कर रहा है? ऐसा करते हैं, अपन मंदिर चलते हैं। और मंदिर में प्रसाद चढ़ा आएँगे तो पास हो जाएँगे। मंदिर इसलिए तो नहीं आते कि महाराज अरे जी, उस दिन आते हैं जगत के लोग। भगवान कब याद आते हैं? जब बुरे दिन आते हैं तो जल्दी भगवान याद आते हैं, लेकिन जब अच्छे दिन होते हैं तो भगवान नदारद हो जाते हैं। आप लोग कौन से वाले हो? अच्छा, भगवान अच्छा करता है कि बुरा करता है, यह बता दीजिए। अच्छा ही करता है ना? बुरा तो नहीं करता ना? अब मैं पूछता हूँ, एक व्यक्ति को बड़ा ऐसा ही विश्वास था। दो फ्रेंड थे। एक थोड़ा श्रद्धालु था, एक आप जैसा था। मतलब जिसको भगवान पे कभी-कभी विश्वास होता है, कभी-कभी नहीं होता है।
आपने खूब मेहनत की, खूब मेहनत की, लेकिन कुछ मिला नहीं
आपको रोज विश्वास होता है? अच्छा, आपको प्रेयर करने से भगवान पास कर देंगे? आपका जीवन सुखी कर देंगे ना? किस-किस को विश्वास है? किसी को नहीं? अच्छा, इसलिए तो शायद आप मंदिर नहीं आते। अच्छा, जिसको यह विश्वास है कि भगवान पास कर देंगे, वह कौन-कौन हैं? कोई नहीं है? भगवान नहीं पास करेंगे? तो अच्छा फिर पास कौन करता है? पढ़ाई करने से सब पास हो जाते हैं ना? तो जितने लोग पढ़ाई करते हैं अपने जीवन में, मेहनत करते हैं, उनको वही फल मिलना चाहिए जैसी मेहनत करते हैं। कई बार यह होता है आपने खूब मेहनत की, खूब मेहनत की, लेकिन कुछ मिला नहीं। हाथ में रिजल्ट्स नहीं आए, बताओ।
भगवान सुख करते हैं और भगवान सुखी करते हैं
किसने आपको फेल किया? समवन इज़ देयर, राइट? हमारी मेहनत करने पर भी हमें रिजल्ट्स नहीं मिलते हैं। कौन सी पावर है जो बैकएंड पर काम कर रही है, जो मेरे को मेरे रिजल्ट्स नहीं देने दे रही है? कुछ न कुछ तो होगा। भगवान को, भगवान कितने लोग मानते हैं? अच्छा, भगवान जो है, वह सब जगत को सुखी करता है, इतना कौन मानता है? भगवान सुखी देखते हैं ना, सुख करते हैं ना? बिल्कुल, भगवान सुख करते हैं और भगवान सुखी करते हैं, भगवान दुखी करते हैं।
जितना कुछ होता है, पत्ता-पत्ता किससे हिलता है? भगवान की मर्जी से पत्ता-पत्ता हिलता है ना? जो कुछ होता है भगवान की मर्जी से होता है। इस जगत में जो कुछ देखा जाता है भगवान पत्ता-पत्ता हिलाते दिखे हैं। सही है ना? इतने लोग कौन-कौन मानता है कि भगवान की मर्जी से पत्ता-पत्ता हिलता है? बहुत बढ़िया। तो जब भी भगवान की मर्जी होती है कि सार्थक को गुस्सा आए,सार्थक, भगवान की मर्जी से तुम्हें गुस्सा आया ना?
अच्छा, आप लोग सब अच्छे कुलों में जन्मे
क्यों, पत्ता-पत्ता किसकी मर्जी से हिलता है? जब भी तुम पाँच पाप करते हो, किसकी मर्जी से करते हो? अरे भगवान की मर्जी के बिना कुछ काम होता नहीं है, फिर आपकी मर्जी कैसे चलेगी? आप फेल हुए तो क्यों हुए? भगवान की मर्जी से। आप पास हुए तो क्यों हुए? अच्छा, आप लोग सब अच्छे कुलों में जन्मे। लेकिन क्या आप जानते हैं, भगवान क्या कर रहा है? भगवान का काम क्या है? यह सब कंट्रोल भगवान का काम है पूरे वर्ल्ड को कंट्रोल करना लाइक अ कठपुतली देखी है? कठपुतली देखी, कठपुतली? एक ऊपर पीछे बंदा होता है। वह बंदा होता है, जब सामने कठपुतलियाँ होती हैं और वह डांस करती हैं कभी, कभी मुस्कुराती हैं, कभी ठुमके मारती हैं। मंच संचालन विजय शास्त्री ने किया स
यह मौजूद रहे कार्यक्रम में
इस मौके पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन , रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल)आशीष जैन (बाबा), राजीव जैन, सचिन जैन(तार) , आशु (वी.के), रोहित जैन,नितिन, दीपक, सनी, अनिकेत,मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त मंडल एवं सकल जैन मौजूद था।




