इंदौर। आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज ने नेमी नगर जैन कॉलोनी में घूंघट गार्डन स्थित सन्मति समवशरण में अपने मंगल प्रवचन में जिनेंद्र भगवान की भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि मनुष्य जंगल में रहे या बस्ती में, लहरों में रहे या कश्ती में महंगी परिस्थितियों में रहे या साधारण जीवन जिए, लेकिन उसका जीवन भगवान जिनेंद्र की भक्ति से जुड़ा रहना चाहिए। भक्ति के लिए स्थान और परिस्थितियां नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण आवश्यक हैं। गुरुदेव ने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से बताया कि राम-सीता ने वन में रहते हुए भी भक्ति की, श्रीपाल ने समुद्र की लहरों के बीच भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। इसी प्रकार अंजन चोर ने भी भक्ति की, चंदना ने जेल में रहते हुए आराधना की और सुदर्शन ने सूली पर भी धर्म के प्रति अपनी आस्था बनाए रखी। ये प्रसंग बताते हैं कि विपरीत परिस्थितियां भी सच्ची भक्ति के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं।

हमें धर्म, साधना और भक्ति के लिए अनुकूल वातावरण मिला

आचार्यश्री ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमें धर्म, साधना और भक्ति के लिए इतना अनुकूल वातावरण मिला है। सम्मेद शिखरजी के पावन वातावरण का आनंद केवल तस्वीरें देखने से प्राप्त नहीं हो सकता। गिरनार की ऊंची-ऊंची चोटियों पर चढ़ने का अनुभव केवल टीवी पर देखकर नहीं लिया जा सकता। इसी प्रकार मंदिरों में होने वाली पूजा, विधान और सामूहिक भक्ति का वास्तविक आनंद भी प्रत्यक्ष रूप से सहभागी बनने पर ही प्राप्त होता है।

उज्जैन और देवास आदि स्थान से श्रावक आकर कर रहे धर्म आराधना

इन दिनों इंदौर की पावन धरा पर आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में 11 दिवसीय इंद्रध्वज महामंडल विधान का भव्य आयोजन चल रहा है। विधान में दूर-दूर से श्रावक-श्राविकाएं पहुंचकर श्रद्धा और भक्ति के साथ धर्माराधना कर रहे हैं। उज्जैन और देवास सहित विभिन्न क्षेत्र से भी श्रावकों का आगमन हो रहा है। सामूहिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। इंदौर में आगामी 25 से 29 नवंबर पंचकल्याणक महामहोत्सव की संभावना है।