विन्रमता को जीवन रूपी बगिया में लाइए, जिसमें सुंदर-सुंदर पुष्प खिल सकें। मुनि श्री ने यह भी कहा कि समय का मूल्य पहचानिये। सार्थक कामों में खर्च किया गया समय तिजोरी में सुरक्षित हो जाता है, वहीं बातों और गप्पों में हांका गया समय कूड़ेदान में चला जाता है। उदासी को जीतिए, नहीं तो आप संसार के सुंदर उपवन में चिंता ,तनाव और अवसाद के कांटों से भरे हुये बबूल भर बनकर रह जाएंगे। प्रलय आने पर समुद्र भी अपनी मर्यादा छोड़ देता है लेकिन सज्जन लोग महाविपत्ति आने पर भी मर्यादा नहीं छोड़ते। इस अवसर पर हस्तिनापुर (उत्तरांचल) से आये और जैन तीर्थंकर की जन्म स्थली के विकास में जीवन समर्पित करने वाले स्वामी रविन्द्र भैया जी ने गुरुवर के चरणों में श्रीफल चढ़ाया और आशीर्वाद प्राप्त किया। यह जानकारी नवीन जैन और राज कुमार अजमेरा ने दी।
अच्छा और विनम्र व्यवहार ही देगा आपको नई पहचान - मुनि विशल्य सागर

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