दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में रविवार को आचार्य विनम्र सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में मूल नायक आदिनाथ भगवान की वृहद शांतिधारा (अभिषेक) की गई। महामंत्रों का उच्चारण आचार्यश्री विनम्र सागर जी महाराज ने किया। इस अवसर पर आचार्यश्री के प्रवचन भी हुए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर...
इंदौर। तीर्थ स्वरूप दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में रविवार को आचार्य विनम्र सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में मूल नायक आदिनाथ भगवान के मस्तक पर 1008 महामंत्रों से वृहद शांतिधारा (अभिषेक) की गई। महामंत्रों का उच्चारण आचार्यश्री विनम्र सागर जी महाराज ने किया। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि शांतिधारा करने का सौभाग्य डॉ. जैनेंद्र जैन, अरविंद अखिलेश सोधिया, जिनेश जैन, सुरेश पड़ोसी, हीरालाल शाह, डीएल जैन, अतुल महेंद्र जैन, पवन चैलेंजर, नरेंद्र राकेश नायक, जय कुमार सेठ, अभिषेक बांझल, आलोक नेता आदि ने प्राप्त किया। इस अवसर पर आचार्य विनम्र सागर जी ने कहा कि वृहद अभिषेक, शांतिधारा एवं भगवान की भक्ति भाव से आराधना करने का महत्व एवं उसका फल करने वाले और देखने वाले दोनों को ही मिलता है। आनंद, पुण्य एवं सम्यकत्व की प्राप्ति होती है।

उनका मन निर्मल हो जाता है। भगवान इस संसार रूपी समुद्र से हमें तारने में सक्षम है। आपने कहा कि भगवान का अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा जब भी करें राग द्वेष का त्याग कर प्रसन्न मन और भक्ति भाव से करें। भगवान का जितना गुणगान आप करेंगे। उतना आपका मन प्रसन्न होगा और आपका क्षयोपषम (ज्ञान) बढ़ेगा। आभार ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने माना।