जयपुर। जनकपुरी जैन मंदिर परिसर में आचार्य श्री आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में 700 मुनिराजों की रक्षा एवं वात्सल्य की स्मृति में त्रिदिवसीय श्रमण रक्षा महामहोत्सव श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। महोत्सव के प्रथम दिन बुधवार को श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक 250 अर्घ्य अर्पित किए। महोत्सव के अंतर्गत प्रातःकाल नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद पूजन-विधान हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अर्घ्य समर्पित कर उपसर्ग-विजेता मुनिराजों के प्रति अपनी श्रद्धा, वात्सल्य एवं धर्मरक्षा का संकल्प व्यक्त किया। विधान पं. प्रकाश चंद द्वारा संपन्न कराया जा रहा है।

सौधर्म इंद्र बनने का मिला सौभाग्य

बुधवार को सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य राजकुमार बाकलीवाल को प्राप्त हुआ, वहीं गुरुवार को देवेन्द्र कासलीवाल को सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य होगा। महोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक वातावरण बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागिता कर धर्मलाभ ले रहे हैं।

धर्मलाभ लेने का आह्वान किया

प्रबंध समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से महोत्सव के आगामी दो दिनों के कार्यक्रमों में भी अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया है। महोत्सव के अंतिम दिन शुक्रवार को भगवान श्रेयांसनाथ का निर्वाणोत्सव श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा।