इंदौर। छत्रपतिनगर स्थित दलाल बाग में इन दिनों ज्ञान गंगा प्रवाहित हो रही है। सुधा चातुर्मास में यहां श्रावक-श्राविकाएं इसमें गोते लगाकर अपने अज्ञान को त्यागने का संकल्प ले रहे हैं। दलाल बाग में विराजित मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी ने शुक्रवार को अपने प्रवचन में सेवा धर्म के बारे में विस्तार से समझाया। मुनिश्री ने जीवन में डरने से बचने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपनी मंगल देशना में कहा कि भगवान की पूजा करने से भगवान को लाभ नहीं होता। जो व्यक्ति पूजा करता है उसे लाभ होता है। बड़ों की सेवा करने से बड़ों को कोई लाभ नहीं होता, बल्कि सेवक को लाभ मिलता है। उसे आशीर्वाद मिलता है।
गुरु सेवा करने का लाभ शिष्य को
मुनिश्री ने प्रवचन में आगे कहा कि संसार में दो तरह के लोगों को लाभ होता है। पहला लाभ मालिक को लाभ होता है, क्योंकि उसका काम हो रहा है। दूसरा लाभ नौकर को होता है क्योंकि उसे आजीविका मिल रही है। उन्होंने आगे कहा कि गुरु की सेवा करने का लाभ गुरु को नहीं होता है। गुरु सेवा करने का लाभ शिष्य को होता है। गुरु तो पढ़े हुए हैं। वे पढ़ा रहे हैं। पढ़ाने का उन्हें लाभ नहीं होता, बल्कि शिष्य को लाभ हो रहा है। वह ज्ञान लेकर जा रहा है। गुरु तो जानकार हैं। शिष्य अज्ञानी है। इसलिए सारा लाभ तो शिष्य को ही मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया में पढ़ाने की चर्चा नहीं होती, बल्कि पढ़ने की चर्चा होती है।
वैयावृति नाम का व्रत है
मुनिश्री ने आगे कहा कि वैयावृति कराने वाले को कुछ नहीं मिलता। जो वैयावृति कर रहा है उसे तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है। वैयावृति नाम का व्रत है। मुनिश्री सुधासागर जी ने आगे कहा कि अभाव में समभाव का भाव जाग्रत करना चाहिए। सुख के दिन में मंदिर आओगे तो सुख बढ़ेगा और दुख के दिन में गार्डन में जाओगे तो दुख कम हो जाएंगे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि मन से डर को बाहर निकाल दो।
जीवन से डर को बाहर निकालो
इस दुनिया में सब डरते हैं। पहले ईट के तकिये पर भी नींद आ जाती थी। आज डर की वजह से डनलप के गद्दे पर भी नींद नहीं आती। मुनिश्री ने कहा कि चूहा बिल्ली से डर रहा है। बिल्ली कुत्ते से डर रही है। कुत्ता शेर से डर रहा है। शेर शिकारी से डर रहा है और शिकारी सांप से डर रहा है। इसलिए अपने जीवन से डर को निकाल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भिखारी बनने से अच्छा है कि भिक्षुक बन जाओ।
मंगल प्रवचन कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
कार्यक्रम में सांगानेर, गुना, भोपाल सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे। इस अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से की गई। दीप प्रज्वलन किया गया। इसके बाद मुनिश्री का प्रवचन आरंभ हुआ। चातुर्मास के पुण्यार्जक चक्रवर्ती परिवार मनीष सपना गोधा, नवीन शिवानी गोधा, अशोक शांता देवी जैन, आकाश दीपिका कोयला, विकास जैन, विनिता जैन, तीेर्थेश जैन, अवनि, रिद्धि जैन आदि मौजूद रहे। संचालन अनुराग जैन ने किया।



