इंदौर। आचार्य श्री सुनीलसागरजी के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में चल रहे वर्षायोग में दशलक्षण महापर्व के पावन अवसर पर बुधवार को उत्तम त्याग धर्म की आराधना श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ की गई। प्रातःकालीन बेला में धार्मिक वातावरण के बीच अध्यात्म योग का आयोजन हुआ, जिसमें साधना एवं आत्मचिंतन के माध्यम से धर्म के मर्म को समझने का अवसर मिला। इसके बाद आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी गुरुदेव ने उत्तम त्याग धर्म पर प्रेरणादायी प्रवचन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि त्याग केवल वस्तुओं को छोड़ देना नहीं, बल्कि वस्तुओं के प्रति ममत्व और आसक्ति का त्याग करना है। मनुष्य बाहरी चीजों का त्याग तो कर देता है, लेकिन जब तक भीतर का ‘मेरा’ और ‘मैं’ नहीं छूटता, तब तक त्याग की वास्तविक अनुभूति नहीं हो सकती। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में अनावश्यक इच्छाओं, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे आंतरिक विकारों का त्याग ही आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
त्याग के आध्यात्मिक महत्व बताया
इस अवसर पर सन्मति प्राकृत विद्यापीठ के विद्यार्थियों द्वारा उत्तम त्याग धर्म की भावना पर आधारित नाट्य प्रस्तुति दी गई। विद्यार्थियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से त्याग के आध्यात्मिक महत्व को सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने सराहा। धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलाचरण एवं अन्य मांगलिक आयोजन हुए। संपूर्ण परिसर भक्तिभाव और धर्ममय वातावरण से ओत-प्रोत रहा।
संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी
संध्याकालीन बेला में शंका-समाधान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने धर्म एवं आध्यात्मिक जीवन से जुड़े प्रश्न रखे और उनके समाधान प्राप्त किए। इसके पश्चात मंगलमय आरती का आयोजन हुआ। आरती के बाद विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई, जिसमें श्रद्धालुओं एवं बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। दशलक्षण महापर्व के इस पावन अवसर पर दिनभर चले धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों ने उपस्थित जनसमुदाय को त्याग, आत्मचिंतन और संयम के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।




