इंदौर। इंदौर की धरा पर छत्रपति नगर के दलाल बाग में विद्या सुधा देशना मंडप में गुरुवार को मुनिश्री सुधासागर जी ने पाप, पवित्र आत्मा, पापी और पुण्यात्माओं के बीच फर्क बताया। मुनिश्री ने कहा कि पापी को नरक में जाने से बचाया जा सकता है। जैसे अंजन चोर। अंजन चोर का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अंजन चोर पापी था, लेकिन उसकी गैंग नहीं थी। वह अकेला था। मुनिश्री ने कहा कि कौन महान बनता है। कौन आदर्श व्यक्ति बनता है। कौन मरकर अमर हो जाता है। इस हम तीन दिन से चर्चा कर रहे हैं। आज हम पाप कर्म के बारे में बातचीत करेंगे। दुनिया में दो तरह के व्यक्ति होते हैं। एक जो स्वयं दुखी होता है और दूसरों को भी दुखी करता है। वह स्वयं पाप करता है और दूसरों को भी पाप कर्म में शामिल करता है।
महान आत्माएं वह होती है, जो कभी नहीं मरते
मुनि श्री ने कहा कि पूज्य कुंद-कुंद स्वामी ने कहा है कि जो भ्रष्ट है पतित है उससे खतरा नहीं है। खतरा तो उससे है जो दूसरों को भी भ्रष्ट और पतित बनता है। ऐसे लोगों से बचना चाहिए। दुनिया में पाप करने वालों की कमी नहीं है। उन्होंने रावण और सीता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रावण पापी था। उसने सीता जैसी पवित्र सती को दूषित करने की कोशिश की। इसलिए उसे हर साल लाखों साल बीत जाने के बाद भी दशहरे मैदान में जलाया जाता है। हर साल उसे जीवित कर लिया जाता है और फिर मारा जाता है। यह उसके पाप कर्म के कारण ही हो रहा है। उन्होंने कहा कि महान आत्माएं वह होती है, जो कभी नहीं मरते। वे दूसरों को भी धर्म करने से नहीं रोकते। ऐसी आत्माएं कभी नहीं मरतीं।
पाद प्रक्षालन, दीप प्रज्वलन इन्होंने किया
गुरुवार को दलाल बाग में इंदौर से सुशीला रमेश सामरिया, संजय सामरिया परिवार, ऋषभ जैन, मोहिवाल, अनामिका, विभा, सुदर्शन जैन, स्मृति जैन, नवीन गोधा, दिल्ली के गृह मंत्रालय से आए सीपी तिवारी रत्नात्रय टीम आदि ने पाद प्रक्षालन किया। इसके बाद दीप प्रज्वलन किया। इस अवसर पर आनंद गोधा, मयंक जैन, हर्ष जैन, अर्चना जैन, सौरभ बड़जात्या, सोनाली बागड़िया आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम में बालिकाओं की ओर से सुधासागर समवशरण की प्रतिरूप राखी बनाई गई। इसका प्रदर्शन मंच से किया गया। संचालन अनुराग जैन ने किया।



