इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी में शुक्रवार को आचार्यश्री सुनीलसागर जी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले, सत्य का पाठ पढ़ाने वाले और अणुव्रतों के पालन का संदेश देने वाले महात्मा गांधीजी ने देश को वर्षों की गुलामी से स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित अहिंसा के सिद्धांत को महात्मा गांधीजी ने व्यावहारिक जीवन में उतारकर समाज के सामने उसका प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन अहिंसा, सत्य और संयम की शक्ति का अद्भुत उदाहरण रहा। इसी क्रम में आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज की जन्मतिथि पर उनके विलक्षण व्यक्तित्व और तपस्वी जीवन का स्मरण किया गया। कहा जाता है-“सागर में से तो बहुत-सी कटोरियां भर जाती हैं, लेकिन विमलसागर एक ऐसे अद्भुत संत थे, जो कटोरी से निकले। उनकी माता का नाम कठोरी बाई था। इसी संदर्भ में उनके जीवन से जुड़ा यह प्रसंग उनके व्यक्तित्व को और भी विशिष्ट बनाता है।

संयम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश पहुंचाया

आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज ने अपने जीवन को धर्म, साधना और जनजागरण के लिए समर्पित किया। वे देश की तीन परिक्रमा करने वाले प्रथम साधु के रूप में भी स्मरण किए जाते हैं। उनके व्यापक विहार ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में जैन धर्म, अहिंसा, संयम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश पहुंचाया। उनका जीवन केवल साधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अपने आचरण और विहार के माध्यम से धर्म को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। तप, त्याग, संयम और आत्मसाधना से परिपूर्ण उनका जीवन आज भी साधु-संतों और श्रावक समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

आचार्यश्री के लिए आत्मकल्याण और धर्म प्रभावना ही केंद्र में रही

जीवन की अंतिम अवस्था में आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज ने सम्मेद शिखर जी की पावन भूमि पर उत्तम समाधिमरण प्राप्त किया। उनका संपूर्ण जीवन साधना की उस यात्रा का प्रतीक रहा, जिसमें जन्म से लेकर अंतिम क्षण तक आत्मकल्याण और धर्मप्रभावना ही केंद्र में रही। आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज की जन्मतिथि पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन ।