महरौनी। आत्मचिंतन और मानसिक शांति के उद्देश्य से प्रातः 6.50 बजे से 07.05 बजे तक 15 मिनट मौन साधना करने का आह्वान किया गया है। मौन साधना का उद्देश्य मन में उठने वाले भावों को दबाना या भड़काना नहीं, बल्कि उन्हें शांत दृष्टि से देखते हुए धीरे-धीरे उनके ऊपर उठना है। इस संबंध में माधव मुरारी बादल शिक्षक कन्या प्राथमिक विद्यालय गढ़ौली कलां विकासखंड महरौनी ने कहा कि सच्चा मौन तभी प्रारंभ होता है, जब व्यक्ति अपने भीतर उठने वाले विचारों, क्रोध, भय, बैचेनी और इच्छाओं को तत्काल प्रतिक्रिया दिए बिना देखना सीखता है। साधना के दौरान कभी मन अत्यधिक अशांत हो सकता है, छोटी-सी बात पर क्रोध आ सकता है अथवा शरीर और मन में बेचौनी व उत्तेजना महसूस हो सकती है। ऐसी स्थिति को साधना की असफलता नहीं, बल्कि साधना की वास्तविक परीक्षा समझना चाहिए।
नियमित मौन साधना व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण का देती है अवसर
उन्होंने कहा कि क्रोध आने पर उसे दबाना भी नहीं है और उसके अनुसार व्यवहार भी नहीं करना है। शांत होकर यह समझने का प्रयास करना चाहिए कि क्रोध के पीछे वास्तविक कारण क्या है- अहंकार, अपेक्षा, दुख, अपमान अथवा किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति आसक्ति। उन्होंने कहा कि जब क्रोध आने के बावजूद व्यक्ति संयम बनाए रखता है और बैचेनी के समय भी स्वयं को संभाल पाता है तब मौन धीरे-धीरे उसके जीवन का संस्कार बनने लगता है। नियमित मौन साधना व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण, संयम और मानसिक शांति की दिशा में आगे बढ़ाती है।




