आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में शनिवार को आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी के शिष्य श्रमण मुनि श्री 108 समत्व सागर जी, श्रमण मुनि श्री 108 शील सागर जी श्रमण मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर जी ससंघ के सानिध्य में धर्म सभा का शुभारंभ हुआ। पदाधिकारियों ने आचार्य विराग सागर जी महाराज जी के चित्र का अनावरण और मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया। इस अवसर पर मुनि श्री समत्व सागर जी ने कहा कि कि हड्डियों को चीरने वाले कष्ट तो दूर हैं, तुम्हारे हृदय को चीर के जो रखे हैं ऐसे कष्ट तुम्हारे जीवन में। इसके घाव का और कब से लगे हैं? बहुत पुराने हैं, बहुत पुराने हैं और पुराने घाव को भरने में समय जरूर लगता है। आपके जितने भी दुख के दिन आते हैं, वे तुम्हारे पुराने घाव पर लगने वाली चोटें ही हैं। लगे पर लगना एक बार छोटी सी चोट लग जाए ना, छोटी सी चोट लग जाए, तब समझ में आता है इस छिंगली (छोटी उंगली) की कीमत क्या है। छोटी सी छिंगली दिखती है, छोटी सी छिंगली की भी अपनी एक कीमत होती है, लेकिन हम तभी समझ पाते हैं जब उस पर चोट लगती है कि यह भी बहुत काम कर रही थी। ऐसे ही छोटी-छोटी सी वे दुख के दिन, हमारे जीवन के जो दुख के दिन हैं, वे छोटे-छोटे नहीं हैं, वे लगे पर लगने वाले घाव हैं। पूर्व से हमारे बहुत गहरे घाव हैं, जो हमारे अंदर कषायों ने दे रखे हैं। उन कषायों के कारण बार-बार हमें चोट जल्दी लग जाती है।
आपके घाव जो आपको बार-बार दिए गए हैं, वह सामने रहेगा
मुनिश्री ने कहा कि पंडित जी, ऐसे यदि कहीं में हाथ रख दो ना, तो कोई दिक्कत नहीं है लेकिन, चोट रखे पर हाथ रख दो तो? कष्ट होगा और वह घाव भरेगा नहीं, खुल जाएगा। वहां आपके साथ यही हो रहा है। पुराने घाव जो कर्मों ने तुम्हें दे रखे हैं, तुम उसी में बार-बार चोट पहुँचाते हो और उनको हरा कर बैठते हो। अगर कहूं भी ना, गुलाब दादा, अगर मैं कहूं कि भाई छोड़ दो और आगे बढ़ो अरे, ऐसे कैसे छोड़ दूं? उसने मुझे कष्ट दिया है। उसने मुझे बहुत कुछ कह दिया है, मैं उसको ऐसे ही माफ कर दूंगा क्या? एक बार सबक तो सिखा दूं! एक बार मजा तो चखा दूं उसके बाद तो मैं आगे बढूंगा। यानी आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे, आप वहीं अटके रह जाएंगे और बल्कि आपके घाव जो आपको बार-बार दिए गए हैं, वह सामने रहेगा, आपके घाव को हरा-भरा करता रहेगा। तो क्या उनको छोड़ के चला जाऊं? नहीं, छोड़ के नहीं जाना है। उपाय करना है उस घाव को भरने का और वह घाव के भरने का उपाय जब तक नहीं समझेंगे, तुरंत ठंडा भी नहीं होगा। तुरंत शांति भी नहीं मिलेगी लेकिन, नियत है यदि धर्म की मरहम तुम्हारे घावों पर लग जाए, तो वह घाव भरना प्रारंभ हो जाएंगे और जैसे-जैसे भरेंगे, वैसे-वैसे शांति और पीड़ा कम हो जाएगी।
21 दिन तक तो अनुष्ठान कीजिए
हम धर्म को तुरंत वाली वस्तु मानते हैं। एक दिन प्लास्टर लगाया, दूसरे दिन खोल के फेंक दिया। एक दिन प्लास्टर लगाया, दूसरे दिन खोल के, चार दिन लगाया, पांच दिन लगाया, आठ दिन लगाया इतने में भी यह हड्डी नहीं जुड़ रही है? कहते हैं भैया 21 दिन तक तो अनुष्ठान कीजिए, प्लास्टर लगा रहने दीजिए। जब गहरे घाव हों ना, तो तुरंत काम नहीं बनता है। जितने गहरे घाव हैं, उतना समय लगता है। लेकिन काम जरूर होता है। काम जरूर होता है। ऐसे ही ज्ञानियों, जब आप जिन-धर्म के पास आए, जिन-शरण में आए और आपकी वह अनंत काल के घाव पड़े हुए हैं जो राग-द्वैषात्मक हैं, कषाय के रूप में हैं, आपके जीवन को कष्ट दे रहे हैं, और आपने थोड़ी धर्म की मरहम लगाई, आपके जीवन में तुरंत बदलाव नहीं दिख रहा है, लेकिन ध्यान रखिए, वह मरहम अपना काम कर रही है। जितनी बार आप प्रवचन सुन रहे हैं, मरहम लगा रहे हैं, लेकिन होता यह है, यहाँ मरहम लगाते हो, बाहर जा के तोड़ देते हो। बाहर जा के प्लास्टर फेंक दिया! अब बताओ, दर्द होगा कि नहीं? लगा तो रहने दोगे! इसलिए अच्छा है कि साढ़े तीन-चार महीने मिलते हैं ना, यह बहुत गहरे से गहरे घाव को खत्म कर सकते हैं।
दूसरों से भी अपनी रक्षा कीजिए
ज्ञानियों, ऐसे ही यदि आप अपनी मरहम-पट्टी कराना चाहते हैं, अपने दुखों को नाश करना चाहते हैं, और धर्म की थोड़ी सी मरहम-पट्टी आपके हृदय में विराजमान भी हो गई है, अब दूसरों से भी अपनी रक्षा कीजिए कि वह कुछ बोले भी ना, फिर से चोट को. फिर से गड़े मुर्दों को उखाड़ना भी चाहे ना, तो अपनी रक्षा अपने आप कीजिए। फिर से कुरे दूंगा, तो घाव गहरे हो जाएंगे। मंच संचालन पंडित सतेंद्र जैन साहूला ने किया।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
इस मौके पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन ,रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती ज्वैलर्स), शैलेश जैन, मुकेश जैन,विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, सचिन जैन, आशु जैन (वी.के), विजय जैन शास्त्री, आशु बाबा, अनिकेत जैन, रोहित जैन, नितिन जैन,सतेंद्र जैन, सोनू), देवेंद्र जैन, मुरारी लाल जैन, दीपक जैन, गौरव जैन, मुन्ना लाल जैन, संभव जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज के लोग मौजूद थे।




