चैत्र वदी नवमी को भारतोत्सव मनाया जाए: लेखिका पुष्पा पांड्या ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोेध किया
संवाददाता: Reporter: Shree Phal News•इंदौर•11/2/2026, 11:28:53 pm

वरिष्ठ लेखिका और चित्रकार पुष्पा पांड्या ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निवेदन किया कि प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ और उनके ज्येष्ठ पुत्र भरत चक्रवर्ती जी के जन्म दिवस चैत्र वदी नवमी को भारतोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा की जाए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर...
इंदौर। वरिष्ठ लेखिका और चित्रकार पुष्पा पांड्या ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निवेदन किया कि प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ और उनके ज्येष्ठ पुत्र भरत चक्रवर्ती जी के जन्म दिवस चैत्र वदी नवमी को भारतोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा की जाए। यह दिवस इस बार 12 मार्च को है। इस दिन को भारत दिवस के रूप में मनाए जाने का की घोषणा से समग्र जैन समाज हर्षित होगा। उन्होंने बताया कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव और उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रथम चक्रवर्ती भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा है। इसलिए चैत्र वदी नवमी को भारतोत्सव या भारत दिवस के रूप में मनाया जाना श्रेयस्कर होगा। पत्र में उन्होंने मांग की है कि पाठ्य पुस्तकों में उनके पाठ पढ़ाए जाएं। उनकी विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित भी होनी चाहिए। साथ ही यह भी अनुरोध किया कि इस दिन पशु वध एवं मांस विक्रय केंद्र बंद रखे जाएं तथा मांसाहारी खाद्य सामग्री हवाईजहाज, रेल, होटल्स, दाबों ठेलों आदि में भी बनाने और परोसने पर पाबंदी लगाई जाए। पुष्पा पांड्या ने बताया कि कर्मयुग के प्रारंभ कर्ता छह कर्मों की शिक्षा द्वारा कौशल की शिक्षा देकर जीवन जीने की कला सिखाने वाले 72 कला के प्रणेता जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी और उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत जिनके नाम से देश का नाम ‘भारतवर्ष’ पड़ा। वे छह खंड के अधिपति 9 निधि और चौदह रत्न धारी थे। भरत जी का जन्म भी अयोध्या नगरी में उनके पिता ऋषभ देव जी के जन्म दिन चैत्र वदी नवमी के दिन हुआ था। जो इस वर्ष 12 मार्च को है। इस दिन को भारतोत्सव के रूप में मनाया जाए। भरत जी और ऋषभ देव जी के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा हो। उनके जीवन पर आधारित जानकारी पाठ्य पुस्तकों में पढ़ाई जाए। भरत चक्रवर्ती जी की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा अयोध्या में स्थापित होनी चाहिए। इससे पूर्व भारत देश ऋषभ देव जी के पिता और भरत के दादाजी राजा नाभिराय जी के नाम से अजनाभ वर्ष कहलाता था। शकुंतला पुत्र भरत के नाम से देश का नाम भारत हुआ ये सर्वथा गलत है। इस आशय को पाठ पाठ्य पुस्तकों से हटाए जाए। शकुंतला पुत्र भरत की कहानी महाभारत के समय की है। जो जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ जी के समय की बात है जबकि, हजारों साल पूर्व से ही हमारे देश का नाम भारत है।
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