इंदौर। दशलक्षण महापर्व के दौरान निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्रावक संस्कार शिविर में जहां देशभर से आए श्रद्धालु धर्म, संयम और संस्कारों की साधना कर रहे हैं, वहीं विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे गुरु भक्त शिविरार्थियों की सेवा में भी जुटे हैं।
इसी क्रम में राजस्थान के रामगंजमंडी से पहुंचा गुरु भक्त मंडल शुद्धता, धार्मिक मर्यादा और अनुशासन के साथ शिविरार्थियों की भोजन व्यवस्था में सेवा दे रहा है।
साधना के साथ दिखाई दे रहा सेवा का भाव
श्रावक संस्कार शिविर में श्रद्धालुओं को नियम, संयम, त्याग, तप और आत्मचिंतन के साथ जीवन में संस्कारों को अपनाने की प्रेरणा दी जा रही है। दशलक्षण महापर्व के आध्यात्मिक वातावरण में शिविरार्थियों की साधना के साथ उनकी सेवा में जुटे श्रद्धालुओं का समर्पण भी दिखाई दे रहा है।
रामगंजमंडी से पहुंचा गुरु भक्त मंडल
रामगंजमंडी से आए गुरु भक्त मंडल में नीरज जैन, नितीन जैन सबदरा, मुकेश जैन, ऋषभ जैन, भूपेंद्र जैन, पदम जैन दुगेरिया एवं प्रमिला जैन दुगेरिया सहित श्रद्धालु सेवा दे रहे हैं।
यह समूह एयरपोर्ट के सामने स्थित बघेरवाल जैन परिसर में रहकर शिविरार्थियों के भोजन की व्यवस्था में सहयोग कर रहा है। सेवा के दौरान भोजन की शुद्धता, धार्मिक मर्यादा एवं अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
मनीष-सपना गोधा ने देखीं व्यवस्थाएं
श्रावक श्रेष्ठी मनीष गोधा एवं सपना गोधा ने सेवा स्थल पर पहुंचकर रामगंजमंडी के गुरु भक्तों द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने भोजन व्यवस्था में रखी जा रही शुद्धता, अनुशासन और प्रबंधन की सराहना करते हुए सेवा दल के प्रयासों की अनुमोदना की।
इस दौरान उन्होंने सेवा दल के सदस्यों से आत्मीय मुलाकात की और उनके साथ छायाचित्र भी लिया।
सेवा को बनाया साधना का माध्यम
गुरु भक्त मंडल के सदस्यों का कहना है कि शिविरार्थियों की भोजन व्यवस्था में सहयोग उनके लिए केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि गुरु सान्निध्य में सेवा-साधना का अवसर है।
दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि, त्याग और संयम की प्रेरणा देता है। ऐसे में साधकों की सेवा के लिए समय और श्रम समर्पित करना भी विनय एवं सहयोग की भावना को मजबूत करता है।
हाड़ौती की सेवा परंपरा की दिखी झलक
रामगंजमंडी से इंदौर पहुंचे श्रद्धालुओं की सहभागिता में हाड़ौती क्षेत्र की धार्मिक सेवा परंपरा की झलक भी दिखाई दे रही है। युवा और वरिष्ठ सदस्य मिलकर शिविरार्थियों की व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं।
इस सेवा ने संदेश दिया कि भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म-साधना में जुटे लोगों के लिए समय, श्रम और सामर्थ्य से सहयोग करना भी सेवा का महत्वपूर्ण स्वरूप है।




