16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का ज्ञान कल्याणक 29 दिसंबर को: पौष शुक्ल दशमी को तिथि को हुआ था केवल ज्ञान

जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का ज्ञान कल्याणक इस बार 29 दिसंबर को आ रहा है। भगवान शांतिनाथ ने पौष शुक्ल दशमी तिथि को केवल ज्ञान प्राप्त किया था। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शांतिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) पौष मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि को हुआ था। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित रिपोर्ट...
इंदौर। जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का ज्ञान कल्याणक इस बार 29 दिसंबर को आ रहा है। भगवान शांतिनाथ ने पौष शुक्ल दशमी तिथि को केवल ज्ञान प्राप्त किया था। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शांतिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) पौष मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि को हुआ था। जब उन्होंने हस्तिनापुर के पास सहस्राम्रवन में अशोक वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या के बाद केवल ज्ञान प्राप्त किया और लोकालोक के सभी पदार्थों को जाना, जिससे उन्हें दिव्य वाणी (देशना) के माध्यम से उपदेश देने और समवशरण की रचना का अवसर मिला। जिससे कई जीव मोक्ष मार्ग की ओर बढ़े। यहां यह भी उल्लेखित है कि दीक्षा के एक वर्ष बाद कठोर तपस्या के बाद नंदिवृक्ष (अशोक वृक्ष) के नीचे उन्हें लोकालोक का संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ और वे सभी 18 दोषों से रहित हो गए। देवताओं ने आकर समवशरण (दिव्य सभा मंडप) की रचना की, और जहां प्रभु ने अपनी दिव्य वाणी (देशना) से उपदेश दिया। भगवान शांतिनाथ जी के 36 गणधर (प्रमुख शिष्य) हुए। जिनमें चक्रायुध प्रमुख थे। जिन्होंने प्रभु की वाणी को जन-जन तक पहुंचाया। इस ज्ञान कल्याणक से मोक्षमार्ग पुर्नस्थापित हुआ और अनेक जीवों ने दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त किया। भगवान शांतिनाथ, जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर हैं और उनका ज्ञान कल्याणक जैन धर्म में शांति, अहिंसा और आत्म-कल्याण के प्रतीक के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस तिथि को भगवान शांतिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक शहर के दिगंबर जैन मंदिरों के अतिरिक्त देश भर में भी पांरपरिक धार्मिक उल्लास और पूर्ण भक्ति भावना के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में विशेष अर्चना के साथ अभिषेक, शांतिधारा पाठ का आयोजन किया जाता है। भगवान शांतिनाथ जी के संदेशों को स्मरण कर धर्म आराधना की जाती है।
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